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जजों की नियुक्ति का मामला: कॉलेजियम द्वारा प्रस्तावित नाम पर सरकार ने की देरी, सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

Mon, 28 Nov 2022 09:01 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जजों की नियुक्ति में देरी के मसले पर आज सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने  राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग(NJAC) का नाम लेकर अहम टिप्पणी की।
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जजों की नियुक्ति में देरी के मसले पर आज सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कॉलेजियम द्वारा प्रस्तावित न्यायाधीशों की नियुक्ति पर विचार करने में केंद्र द्वारा महीनों की देरी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि  ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इस बात से नाखुश है कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग(NJAC) ने संवैधानिक मस्टर पास नहीं किया। बता दें कि दो दिन पहले केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि कॉलेजियम नहीं कह सकता कि सरकार उसकी तरफ से भेजा हर नाम तुरंत मंजूरी करे। फिर तो उन्हें खुद नियुक्ति कर लेनी चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट में सैनिटरी पैड मामले पर भी सुनवाई
स्कूल में कक्षा 6 से 12 की लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि सरकारी, सरकारी अनुदान से चलने वाले और आवासीय स्कूल में लड़कियों को सैनिटरी पैड देने के अलावा अलग टॉयलेट की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने अनुपचारित सीवेज को कोंडली सिंचाई नहर में बहने से रोकने में विफल रहने पर नोएडा पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के NGT के आदेश पर रोक लगा दी है।  

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सुप्रीम कोर्ट ने अफजल खान के मकबरे के पास विध्वंस के खिलाफ सुनवाई बंद की 

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में आदिल शाही वंश के सेनापति अफजल खान के मकबरे के आसपास स्थित ढांचों को गिराने की मौजूदा प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई रोक दी है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि जब तोड़फोड़ हो चुकी है और सरकार भी कह रही है कि इससे अफजल खान के मकबरे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है तो ऐसे में इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया है। अब शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर बंबई उच्च न्यायालय के दो आदेशों के खिलाफ दाखिल याचिका पर ही सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि अफजल खान का मकबरा वन भूमि पर है या नहीं, इसके निर्धारण के मांग वाली याचिका 2017 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जिसपे अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। 

शीर्ष अदालत ने 11 नवंबर को जिला कलेक्टर और महाराष्ट्र में सतारा के उप वन संरक्षक से साइट पर सरकारी भूमि पर कथित अनधिकृत संरचनाओं को हटाने के लिए चलाए गए विध्वंस अभियान पर रिपोर्ट मांगी थी।

तरुण तेजपाल - फोटो : social media
तरुण तेजपाल की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया। तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बंद कमरे में सुनवाई के लिए उनके आवेदन को खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के कुछ जिलों में बार संघों के सदस्यों के आंदोलन पर नाराजगी जताई है। साथ ही जस्टिस एस के कौल और ए एस ओका की पीठ ने यह भी कहा कि वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया से लाइसेंस निलंबित करने सहित उचित कार्रवाई करने की अपेक्षा करते हैं। नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि 'विरोध का मुख्य मुद्दा क्या है? हर जिला उच्च न्यायालय की बेंच चाहता है? आपके पास अपने दरवाजे पर जिला न्यायपालिका हो सकती है, आपके दरवाजे पर उच्च न्यायालय नहीं हो सकता है। पीठ ने साफ किया कि यह नहीं किया जा सकता। ओडिशा इतना बड़ा राज्य नहीं है। 

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ओड़िशा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें कहा गया है कि कई जिलों में बार संघों के सदस्यों द्वारा काम पर न जाने से राज्य की अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक कार्य गंभीर रूप से बाधित हुआ है।

 ईवीएम खराब होने की झूठी शिकायत करने वाले मतदाता को पता होना चाहिए परिणाम: सुप्रीम कोर्ट

ईवीएम मशीन
ईवीएम की खराबी से संबंधित नियम 49MA के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि ईवीएम के बारे में झूठी जानकारी  देने वाले व्यक्ति को  इसके परिणाम के बारे में जानकारी होनी चाहिए क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया ठप हो जाती है। साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता से इस नियम को लेकर एक लिखित नोट भी दायर करने को कहा है। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वह लिखित नोट में बताए कि इस प्रावधान में क्या समस्या है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ईवीएम की खराबी से संबंधित चुनाव नियम के खिलाफ दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसे याचिकाकर्ता ने असंवैधानिक बताया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि 'हम आपको बहुत स्पष्ट रूप से बताते हैं, हमें नियम 49MA के लिए आपके अनुरोध पर विचार करने का कोई कारण नहीं मिला हैं।' आपके अनुसार प्रावधान में क्या गलत है? अपने लिखित नोट में इसके बारे में बताएं। इसके साथ ही अदालत मामले को छुट्टी के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।'

 सुकेश चंद्रशेखर की मंडोली जेल से तबादले की याचिका पर SC ने मांगी रिपोर्ट

जैकलीन फर्नांडिस के साथ सुकेश चंद्रशेखर - फोटो : सोशल मीडिया
सुकेश चंद्रशेखर की मंडोली जेल से तबादले की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता फिर से जेल से शिफ्ट करने की अपील कर रहा है और जेल में अपनी जान को खतरा होने की शिकायत कर रहा है। इस पर अदालत ने अधिकारियों से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 'एक काउंटर दर्ज करें। वह फिर से शिकायत कर रहे हैं। एक तथ्यात्मक रिपोर्ट लें और हमें सूचित करें। आप उनकी शिकायत को इस तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकते, कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है।' गौरतलब है कि न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ ने पहले चंद्रशेखर और उनकी पत्नी लीना पॉलोस की याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था। 

 चंद्रशेखर और उनकी पत्नी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और कई लोगों को ठगने के आरोप में जेल में बंद हैं। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि 23 अगस्त को शीर्ष अदालत के आदेश के बाद तिहाड़ जेल से मंडोली जेल स्थानांतरित किए जाने के बाद चंद्रशेखर पर हमला किया गया था। चंद्रशेखर के वकील ने कहा कि वह चाहते हैं कि उन्हें ऐसी जेल में स्थानांतरित किया जाए जहां उन्हें परेशान न किया जाए।

शीर्ष कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में गैर-कार्यात्मक वैधानिक पैनलों पर SG से किया अनुरोध

सुप्रीम कोर्ट
एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की सहायता मांगी। सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई इस याचिका में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार आयोग सहित कथित वैधानिक पैनल अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) में काम नहीं कर रहे हैं। ये याचिका पुणे स्थित वकील असीम सुहास सरोदे ने दायर की है। 

इस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे याचिका की समीक्षा करके वहां की वर्तमान स्थिति से अवगत कराएं। इसके लिए उन्होंने दो सप्ताह का समय मांगा है। दो सप्ताह बाद इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी। 
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सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सैनेटरी पैड निर्माण - फोटो : Amar Ujala
देश भर के सरकारी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सोमवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई की गई। इस दौरान शीर्ष  अदालत ने केंद्र और राज्यों सरकारों के साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। गौरतलब है कि ये याटचिका सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर की याचिका ने दाखिल की है। वहीं इस पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई की। 

याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से आग्रह करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों की साफ-सफाई का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने अपनी याचिका में सैनेटरी पैड के साथ ही सरकारी स्कूल में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की भी मांग की है। 

कोर्ट टाउन प्लानर या इंजीनियर नहीं, जो सरकार को दे निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट कोई टाउन प्लानर या इंजीनियर नहीं बन सकता जो सरकार को निर्देश दे कि छह महीने में अमरावती राज्य की राजधानी बन जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही किसानों, किसान संघों और केंद्र से आंध्र प्रदेश सरकार की उस याचिका पर जवाब तलब किया, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।

इसरो जासूसी मामला : आरोपियों की जमानत पर नए सिरे से हो सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट को 1994 में इसरो जासूसी मामले में नंबी नारायण को फंसाने के मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है। पीठ ने मामले के आरोपी गुजरात के पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार, केरल के दो पूर्व पुलिस अधिकारियों एस विजयन और थम्पी एस दुर्गा दत्त और एक सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी पीएस जयप्रकाश को जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रहा था।
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