सुप्रीम कोर्ट में एक अपंजीकृत संस्था 'वी द वीमेन ऑफ इंडिया 'की तरफ से याचिका दायर की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। 15वें दिन की सुनवाई के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर न तो पूरी तरह से भारत से जुड़ा था और न ही अन्य रियासतों की तरह उसे विलय समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ सुनवाई कर रही है। इस दौरान सासंद लोन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि भारत की संप्रभुता को कभी चुनौती दी ही नहीं गई है। केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं ने हमेशा कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। सिब्बल ने ने कहा कि हम इसे संविधान की भावनात्मक बहुसंख्यकवादी व्याख्या नहीं बना सकते। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है कि संविधान लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या होगा। भारतीय संविधान में यह तय नहीं है कि एकीकरण किस समय खत्म होगा। सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करना एक राजनीतिक प्रक्रिया है। इसलिए इसका समाधान भी राजनीतिक होना चाहिए। इसपर सीजेआई ने कहा कि हमें ध्यान रखना होगा कि संविधान के ढांचे के भीतर ही समाधान होना चाहिए।
पीठ ने पूछा-370 पर बहस के बाद शिक्षक को क्यों किया निलंबित
हाल ही में सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा, वह जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से यह पता लगाएं कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक जहूर अहमद भट को अनुच्छेद-370 मामले में संविधान पीठ के समक्ष बहस करने के बाद निलंबित क्यों किया गया? अगर यह अदालत में उपस्थिति के कारण है, तो यह प्रतिशोध हो सकता है। स्वतंत्रता का क्या होगा?