कांग्रेस-जदएस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ आज फिर से सुनवाई करेगी। वहीं सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस-जेडीएस के विधायक हैदराबाद पहुंच चुके हैं। तमाम विधायक हैदराबाद के ताज कृष्णा होटल पहुंचे हैं।
उधर, कर्नाटक में भाजपा सरकार बचाने में तो कांग्रेस-जदएस सरकार को गिराने के खेल में लग गई है। बहुमत से 8 सीट दूर भाजपा को सरकार बचाने के लिए हर हाल में विपक्ष के 16 विधायकों की बलि की जरूरत होगी। पार्टी इन विधायकों के इस्तीफे करा कर या मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए मना कर ही सरकार बचा सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस और जदएस ने अपने विधायकों को एक रिजॉर्ट में बंद कर लिया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के 4 विधायक गायब हैं। हालांकि एक निर्दलीय विधायक ने पाला बदल कर एक बार फिर से जदएस-कांग्रेस गठबंधन का दामन थाम लिया है। जबकि भाजपा का दावा है कि करीब डेढ़ दर्जन विपक्षी विधायक उसके संपर्क में हैं, इनमें से ज्यादातर लिंगायत बिरादरी के हैं। लेकिन अब आगे क्या होगा। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई है।
1.
अटॉर्नी जनरल को 48 घंटे में वो दो पत्र कोर्ट में पेश करने होंगे, जो नवनियुक्त सीएम येदियुरप्पा ने राज्यपाल को सौंपे थे। उन्हें ये पत्र गवर्नर से लेकर सुबह 10.30 बजे कोर्ट में जमा करने होंगे।
कारण ---
15 मई और 16 मई को लिखे गए ये पत्र ही राज्यपाल के न्योते का आधार हैं। 16 मई का पत्र सौंपने के बाद येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए बुलाया गया और शपथ के लिए 17 मई का दिन तय हुआ।
2. कांग्रेस-जदएस की याचिका पर सुनवाई करने वाली जस्टिस एके सीकरी की अगुवाई वाली पीठ इन पत्रों की सामग्री को देखना चाहती है।
कारण ---
अदालत यह देखना चाहती है कि क्या येदियुरप्पा की ओर से सौंपे गए पत्रों में राज्यपाल को वह पर्याप्त सामग्री दी गई जिससे उन्हें लगा कि सरकार बनाने के लिए वही सबसे बेहतर विकल्प होंगे, न कि कांग्रेस-जदएस का चुनाव बाद बना गठजोड़।
3.
याची की ओर से कोर्ट में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना था कि राज्यपाल ने येदियुरप्पा को सदन में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय कैसे दे दिया।
कारण ---
सिंघवी के अनुसार, येदियुरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए महज सात दिन का समय मांगा था लेकिन राज्यपाल ने उदारता दिखाते हुए उन्हें 15 दिन का समय दे दिया। यह समय भाजपा को बहुमत का आंकड़े का जुगाड़ने के लिए खरीद-फरोख्त करने को दिया गया।
4.
प्रबल संभावना है कि कोर्ट सदन में शक्ति परीक्षण का समय घटा दे। सबसे बड़े दल को बहुमत साबित करने दे। भाजपा के विधानसभा में 104 तथा कांग्रेस-जदएस के मिलाकर 117 विधायक हैं। यह बहुमत के आंकड़े से ज्यादा बैठते हैं।
कारण ---
अगर शक्ति परीक्षण के बाद, येदियुरप्पा बहुमत साबित करने में नाकाम रहते हैं, तो राज्यपाल के लिए कांग्रेस-जदएस को सरकार गठन करने के लिए बुलाना आवश्यक हो जाएगा।
5.
1988 की सरकारिया आयोग की रिपोर्ट कहती है कि अगर विधानसभा में सबसे बड़ा दल बहुमत साबित करने में नाकाम रहता है तो चुनाव के बाद बनने वाले गठजोड़ को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में इस फार्मूले को अपनाया है।
कारण --
सिंघवी ने पूछा, क्या कर्नाटक के राज्यपाल ने सरकारिया आयोग कि इस बात को ध्यान में रखा कि सबसे बड़े दल को चुनाव बाद बनने वाला गठजोड़ पर वरीयता देने के लिए अन्य दलों और निर्दलीयों का समर्थन होना चाहिए।