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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी उच्च न्यायिक सेवा भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को दी राहत, टिप्पणी में कही ये बात

Tue, 16 Jun 2026 01:42 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा भर्ती परीक्षा के उन अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत प्रदान की है, जिनकी उम्मीदवारी केवल प्रक्रियागत कारणों से निरस्त कर दी गई थी। अदालत ने कहा कि तकनीकी खामियों के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को अवसर से वंचित करना उचित नहीं है। शीर्ष अदालत ने ऐसे अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि उनका अंतिम परिणाम मामले के निर्णय के अधीन रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा भर्ती परीक्षा के उन अभ्यर्थियों को राहत दी है, जिनके आवेदन सक्षम अथॉरिटी के माध्यम से अग्रेषित न होने के आधार पर खारिज कर दिए गए थे। अदालत ने ऐसे अभ्यर्थियों को आगामी मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी। हालांकि उनका परिणाम मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। 
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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, पर एक व दो अगस्त को प्रस्तावित मुख्य परीक्षा के लिए उसकी उम्मीदवारी केवल इसलिए निरस्त कर दी गई क्योंकि आवेदन जिला न्यायाधीश या सक्षम अथॉरिटी के माध्यम से नहीं भेजा गया था। पीठ ने इस तरह की प्रक्रियात्मक शर्तों पर नाराजगी जताई।

केवल तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना गलत : सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा, केवल तकनीकी कारणों से किसी अभ्यर्थी को अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि जिला न्यायाधीश के हस्ताक्षर न होने जैसे आधार पर उम्मीदवारी रद्द करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता और उसके जैसी स्थिति वाले अन्य अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी।
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50 साल पुरानी प्रक्रियाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुरानी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि आधुनिक प्रतिस्पर्धी व्यवस्था में सत्यापन की प्रक्रिया बाद में भी पूरी की जा सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह 50 साल पुरानी प्रक्रियाएं हैं और हम आज भी उनका पालन कर रहे हैं। प्रतिस्पर्धी दुनिया में पहले परीक्षा का आयोजन किया जाता है, फिर मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार होते हैं। सत्यापन बाद में किया जा सकता है। इस तरह तकनीकी आंधार पर आवेदन निरस्त करना उचित नहीं है।
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