सुप्रीम कोर्ट ने नकदी संकट में फंसी एयरलाइंस स्पाइसजेट को राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें स्पाइसजेट को 243 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया गया था।
हाईकोर्ट ने दो सितंबर को यह निर्देश स्पाइस जेट का अपने पूर्व प्रोमोटर कलानिधि मारन और उनकी कंपनी केएएल एयरवेज के साथ चल रहे शेयर ट्रांसफर के विवाद से जुड़े मामले में दिया था।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पाइस जेट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी।
जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम की भी मौजूदगी वाली पीठ ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई में स्पाइसजेट की याचिका पर मारन और उनकी कंपनी को भी नोटिस जारी किया है। साथ ही उनसे चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने अगले आदेशों तक हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।
दो सितंबर को हाईकोर्ट ने मारन की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पाइसजेट को छह हफ्ते के भीतर 243 करोड़ रुपये का ब्याज जमा कराने के लिए कहा था। यह समय सीमा 14 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है।
इससे पहले मारन ने 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए स्पाइसजेट के प्रमोटर अजय सिंह की शेयरहोल्डिंग अटैच करने की गुहार लगाई थी। साथ ही एयरलाइंस का प्रबंधन टेकओवर करने की इजाजत हाईकोर्ट से मांगी थी।
यह है पूरा विवाद
दिसंबर, 2014 में कर्ज में दबी स्पाइसजेट में नकदी संकट के कारण एक दिन के लिए संचालन बंद हो गया था। इसके बाद सह संस्थापक अजय सिंह के फरवरी, 2015 में स्पाइसजेट का नियंत्रण लेना शुरू करने पर विवाद शुरू हुआ।
मारन और उनकी केएएल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपने 350.4 मिलियन शेयर (58.46 फीसदी हिस्सेदारी) महज 2 रुपये के भाव में अजय सिंह को ट्रांसफर कर दिए थे। इसके बाद मारन और केएएल एयरवेज ने इक्विटी शेयर के ट्रांसफर के बदले 18 करोड़ रिडीम वारंट नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का रुख कर लिया।
हाईकोर्ट ने 29 जुलाई, 2016 को स्पाइसजेट और अजय सिंह को 579 करोड़ रुपये अपनी रजिस्ट्री में जमा कराने को कहा। इस आदेश के खिलाफ स्पाइसजेट की अपील को 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। 20 जुलाई, 2018 को आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मारन के 1323 करोड़ रुपये के नुकसान के दावे को खारिज कर दिया, लेकिन उन्हें 579 करोड़ रुपये और ब्याज का रिफंड दिए जाने का आदेश दिया।
ट्रिब्यूनल के इस निर्णय के खिलाफ मारन ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिस पर दो सितंबर को हाईकोर्ट ने 579 करोड़ रुपये के ब्याज के तौर पर 243 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश स्पाइसजेट और अजय सिंह को दिया था।