केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर नौकरी और अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत घर हासिल करने के मामले में एमटीएनएल के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह प्रमाणपत्र 44 साल पहले जारी किया गया था। रमेश चंद मीणा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है जो तीन दशक से ज्यादा समय तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में सेवा देने के बाद 2018 में वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाणपत्र 1976 में राजस्थान के भरतपुर में एसडीएम स्तर के एक अधिकारी द्वारा जारी किया गया था जो उस समय क्षेत्र में तैनात ही नहीं थे।
मीणा ने महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) में नौकरी के लिए प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया और एसटी कोटे के तहत पश्चिमी दिल्ली के विकास पुरी इलाके में डीजी-1 इलाके में 1987 में फ्लैट हासिल कर लिया।
सीबीआई के मुताबिक, मीणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस से ताल्लुक रखते हैं, जहां उनके पूर्वजों की जमीन है। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने पाया कि भरतपुर के डीग के उपजिलाधिकारी द्वारा 10 सितंबर 1976 को जारी प्रमाणपत्र पर कोई क्रमांक नहीं है।