फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट: नोएडा सीईओ को दी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट के गैरजमानती वारंट पर जताई नाराजगी

Sat, 14 May 2022 06:29 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण की पीठ को रितु के वकील ने बताया, वह हाईकोर्ट पहुंची थीं, लेकिन देर हो गई। मामले को कुछ देर के लिए टालने की गुहार लगाई, पर हाईकोर्ट ने वारंट का आदेश पारित कर दिया। 
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय। - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से नाराजगी जताई। शीर्ष कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट ने मामले को जिस तरह से निपटाया, वह तरीका ठीक नहीं है।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण की पीठ को रितु के वकील ने बताया, वह हाईकोर्ट पहुंची थीं, लेकिन देर हो गई। मामले को कुछ देर के लिए टालने की गुहार लगाई, पर हाईकोर्ट ने वारंट का आदेश पारित कर दिया। 

अगले आदेश तक राहत
हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामले में अवमानना के केस में पेश न होने पर माहेश्वरी के खिलाफ वारंट जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को माहेश्वरी को राहत देते हुए वारंट पर रोक की अवधि अगले आदेश तक बढ़ा दी है। मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई में होगी। 
विज्ञापन





आप जमीन ले लेते हैं पर मुआवजा नहीं देते
सुप्रीम कोर्ट ने न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) को फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि जमीन लेने के बाद उचित मुआवजा न देना सामान्य हो गया है।

सीईओ माहेश्वरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमण की पीठ ने नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट समेत 12 लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस दौरान चीफ जस्टिस ने माहेश्वरी के वकील रवींद्र कुमार से कहा कि यह रूटीन हो गया है। हमने कई मामलों में देखा है। आप जमीन का अधिग्रहण करते हैं, जमीन लेते हैं और मुआवजे का उचित भुगतान नहीं करते हैं। नतीजन लोगों को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद भी आप आदेशों का पालन नहीं करना चाहते हैं। अपने मुवक्किल को अनुपालन करने की सलाह दें। माहेश्वरी के वकील कुमार ने कहा कि उन्होंने इसे रिकॉर्ड में रखा है कि आदेश का पालन किया गया है और मुआवजे की पेशकश की गई है।

पति की क्रूरता के संबंध में मृत्यु से पूर्व पत्नी का बयान धारा 498ए के तहत स्वीकार्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पत्नी पर पति द्वारा की गई क्रूरता के संबंध में मृत्यु पूर्व दिए गए पत्नी के बयान साक्ष्य अधिनियम के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत आरोपों की सुनवाई के दौरान स्वीकार्य होंगे।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हालांकि साक्ष्य स्वीकार किए जाने से पहले कुछ आवश्यक शर्तें पूरी की जानी होंगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहली शर्त यह है कि मामले में उसकी मृत्यु का कारण प्रश्न के दायरे में आना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने और भी शर्तों का जिक्र किया।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति की याचिका पर यह टिप्पणी की। अदालत ने अपने आदेश में उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत बरी कर दिया था, लेकिन धारा 498ए के तहत दोषी करार दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें