सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के चार पवित्र शहरों को सभी मौसम में जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण के लिये चारधाम विकास योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं को शुक्रवार को अपनी मंजूरी दे दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस योजना के तहत रोकी गयी परियोजनाओं के निर्माण का काम अगले आदेश तक रूका रहेगा।
न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति विनीत शरण की पीठ ने केन्द्र से कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश पर रोक लगाने की याचिका में अपना हलफनामा दाखिल करें। अधिकरण ने अपने आदेश में इन परियोजनाओं को मंजूरी देने के साथ ही इनकी निगरानी के लिये एक समिति गठित की थी।
चारधान परियोजना का मकसद उत्तराखंड के चार पर्वतीय शहरों-यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को सभी मौसम के अनुकूल सड़कों से जोड़ना है।
क्या है यह चारधाम परियोजना
इस योजना को चार धाम मार्ग का पुनरुद्धार भी कहा जा रहा है। केंद्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चीन सीमा और चार धामों तक पहुंचने वाली सड़कों को विश्व स्तर का बनाया जाना है। इसके तहत करीब 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से 880 किलोमीटर से ज्यादा सड़क चौड़ीकरण का काम होना है। परियोजना को अगले साल मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था मगर कोर्ट के रोक के बाद अब यह मुश्किल लग रहा है।