छत्तीसगढ़ का कोरिया वह इलाका है, जहां आखिरी चीता मारा गया था। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के दस्तावेज के अनुसार भारत में बचे अंतिम तीन चीतों को 1947 में कोरिया के रामगढ़ गांव के जंगल के पास महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने मार गिराया था। सिंहदेव के निजी सचिव ने ही महाराज की तस्वीर के साथ पूरी जानकारी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी को भेजी थी।
चीता अकेला जंगली जानवर है, जिसे भारत सरकार के दस्तावेज में विलुप्त घोषित किया गया है। हालांकि मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कई सरकारों में मंत्री रहे रामानुज प्रताप सिंहदेव के बेटे रामचंद्र सिंहदेव इस तथ्य से सहमत नहीं हैं कि कोरिया में एक साथ मारे गए तीनों चीते, देश के आखिरी चीते थे। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में अंतिम तीन चीते को मारे जाने की बात कही जाती है, लेकिन उसी इलाके में दो साल बाद उन्होंने खुद चीता देखा था।