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90 साल बाद भारत के जंगलों में फिर फर्राटा भरेगा चीता, मिली अफ्रीका से मंगाने की इजाजत

Wed, 29 Jan 2020 03:51 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने दी अफ्रीका से मंगाने की इजाजत, उपयुक्त अभयारण्य में रखा जाएगा
  • दावा किया जाता है कि देश में आखिरी बार चीता 1930 के दशक में देखा गया था
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कोर्ट से नामीबिया से चीते मंगाने की अपील की थी
  • सा 1947 में छत्तीसगढ़ के कोरिया इलाके में भारत का आखिरी चीता मारा गया था
  • चीता अकेला जंगली जानवर है, जो भारत सरकार के दस्तावेज में विलुप्त घोषित है
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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भारत में करीब 90 साल बाद फिर से चीता को बसाए जाने की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को विलुप्त हो चुके दुर्लभ चीते को देश में अफ्रीका से मंगाने की इजाजत केंद्र सरकार को दे दी। ऐसा दावा किया जाता है कि देश में आखिरी बार चीता 1930 के दशक में देखा गया था। दरअसल, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर गुहार लगाई थी कि नामीबिया से अफ्रीकी चीते को मंगाने की इजाजत दी जाए। इसके तहत चीते को वहां से लाकर देश के किसी उपयुक्त अभयारण्य में रखा जाएगा।

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चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रोजेक्ट की निगरानी करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला लेने के लिए पूर्व वन्यजीव निदेशक रंजीत सिंह, वन्यजीव महानिदेशक धनंजय मोहन और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के डीआईजी (वन्यजीव) की तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। यह समिति प्रत्येक चार महीने में पीठ को रिपोर्ट देगी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि अफ्रीकी चीते को भारत लाने से पहले उचित सर्वे किया जाएगा और उसे लाने का फैसला एनटीसीए पर छोड़ा जाएगा।

पीठ ने कहा कि विशेषज्ञ समिति के मार्गदर्शन में एनटीसीए देश में चीते को रखने के लिए सर्वोत्तम ठिकाने का सर्वे करेगा। सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अफ्रीकी चीते को प्रयोग के तौर पर देश में लाकर आकलन किया जाएगा कि वह भारतीय वातावरण के अनुकूल रह सकता है या नहीं। चीते को संभवत: मध्य प्रदेश के नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में रखा जाएगा।

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छत्तीसगढ़ में मारा गया था आखिरी चीता

छत्तीसगढ़ का कोरिया वह इलाका है, जहां आखिरी चीता मारा गया था। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के दस्तावेज के अनुसार भारत में बचे अंतिम तीन चीतों को 1947 में कोरिया के रामगढ़ गांव के जंगल के पास महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने मार गिराया था। सिंहदेव के निजी सचिव ने ही महाराज की तस्वीर के साथ पूरी जानकारी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी को भेजी थी।
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सरकार ने 1952 में चीता को विलुप्त प्रजाति घोषित किया था

चीता अकेला जंगली जानवर है, जिसे भारत सरकार के दस्तावेज में विलुप्त घोषित किया गया है। हालांकि मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कई सरकारों में मंत्री रहे रामानुज प्रताप सिंहदेव के बेटे रामचंद्र सिंहदेव इस तथ्य से सहमत नहीं हैं कि कोरिया में एक साथ मारे गए तीनों चीते, देश के आखिरी चीते थे। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में अंतिम तीन चीते को मारे जाने की बात कही जाती है, लेकिन उसी इलाके में दो साल बाद उन्होंने खुद चीता देखा था।
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