सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय को फटकार लगाई है और लंबे समय से फैसलों के लिए लंबित मामलों पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी उच्च न्यायालयों से ऐसे मामलों की जानकारी देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 67 आपराधिक मामलों में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखने के बावजूद अंतिम फैसला नहीं सुनाने पर हैरानी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय को फटकार लगाते हुए सभी उच्च न्यायालयों को उन मामलों की रिपोर्ट देने को कहा है, जिनमें फैसला अभी भी लंबित है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हालात को बेहद चिंताजनक बताया और कहा कि वे इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश जारी करेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्तों में मांगा जवाब
पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे नहीं चल सकता। पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को चार हफ्तों में अपने-अपने यहां लंबित फैसलों की जानकारी देने को कहा है। उच्च न्यायालयों को 31 जनवरी 2022 से लेकर दिसंबर 2024 तक के उन मामलों की जानकारी देनी होगी, जिनमें फैसला सुरक्षित रख लिया गया है, लेकिन अभी तक फैसला सुनाया नहीं गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल से इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है और कहा है कि आपराधिक और सिविल मामलों की रिपोर्ट अलग-अलग दी जाए और ये भी बताया जाए कि कौन सा मामला एकल पीठ का है और कौन सा मामला खंडपीठ का।
2022 में सुनवाई पूरी, लेकिन अभी तक नहीं सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा पाए चार लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने उनकी अपील पर सुनवाई पूरी कर साल 2022 में ही फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है। इसके चलते वे छूट के लाभ के लिए भी दावा नहीं कर पा रहे हैं।