पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी
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सुप्रीम कोर्ट ने 29 साल पुराने एक मामले में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी को अंतरिम राहत दे दी है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को 1991 के जूनियर इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण व हत्याकांड में अगले आदेश तक पूर्व डीजीपी सैनी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पंजाब सरकार को तीन हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया है। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
पूर्व डीजीपी ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के 8 सितंबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसमें हाईकोर्ट ने मुल्तानी मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट पीठ ने पंजाब सरकार के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा से सवाल किया कि 29 साल पुराने मामले में अब सैनी की गिरफ्तारी की इतनी जल्दबाजी क्यों है? लूथरा ने कहा कि जेड प्लस सिक्योरिटी रखने वाले सैनी इस मामले में फरार हैं। हाईकोर्ट ने सैनी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि सैनी ने अपनी अधिकारों का दुरुपयोग किया है। लूथरा ने कहा कि हाईकोर्ट ने पाया कि सैनी के अमानवीय बर्ताव के कारण जख्मी हुए मुल्तानी की बाद में मृत्यु हो गई। लूथरा ने यह भी कहा कि अब भी पूर्व महानिदेशक सैनी के पास कुछ पुलिस फाइलों को नियंत्रित करने की क्षमता है।
पूर्व डीजीपी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल बहुत ही सम्मानित पुलिस अधिकारी रह चुके हैं, जिन्होंने गोलियों के जख्म खाकर तरक्की की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार उनके पीछे इसलिए पड़ी है, क्योंकि सैनी ने वर्तमान मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज की थी और दो मामलों की चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया था। लेकिन उन जैसे अधिकारी को इस तरह डराया नहीं जाना चाहिए।
29 साल से संघर्ष कर रहा पीड़ित परिवार
वर्ष 1991 में चंडीगढ़ का एसएसपी रहने के दौरान सैनी पर आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और सैनी घायल हो गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने कथित तौर पर 13 दिसंबर की रात में चंडीगढ़ औद्योगिक व पर्यटन निगम के जूनियर इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी का मोहाली में उनके घर से अपहरण कर लिया था। बाद में पुलिस ने मुल्तानी के गुरदासपुर में कादियां पुलिस की हिरासत से भागने का दावा किया था।
बलवंत के भाई पलविंदर सिंह मुल्तानी के लगातार संघर्ष के बाद इसी साल फरवरी महीने में मोहाली थाने में सैनी और छह अन्य के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। मोहाली की एक अदालत ने 21 अगस्त को पंजाब पुलिस को सैनी के खिलाफ हत्या का भी आरोप जोड़ने की इजाजत दे दी थी। यह इजाजत इस मामले में अन्य आरोपियों में शामिल चंडीगढ़ पुलिस के दो सिपाही, पूर्व इंस्पेक्टर जागीर सिंह और पूर्व एएसआई कुलदीप सिंह के सरकारी गवाह बनकर सैनी के खिलाफ गवाही देने के बाद दी गई थी।