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'प्रदूषण से खराब हो रही आवाज': दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सारी गलती किसानों की ही नहीं

Fri, 06 Nov 2026 12:04 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीजेआई सूर्यकांत ने प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय समाज के दूसरे वर्गों की भूमिका पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल उठाया कि संभ्रांत और अमीर वर्ग के लोगों के वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले में सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस दौरान पराली जलाने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल रहे।

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सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने हल्के अंदाज में कहा 'हमें उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।' इस पर मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण लोगों की आवाज तक प्रभावित हो रही है। ऐसा महसूस होता है जैसे रोजाना 30 सिगरेट पी रहे हों।

बारिश से कम हुआ प्रदूषण, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर
अपराजिता सिंह ने बताया कि दिल्ली में बारिश होने के कारण प्रदूषण के स्तर में कुछ गिरावट आई है। उन्होंने 5 नवंबर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उस दिन प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 प्रतिशत था।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली पहले से ही प्रदूषित है और पराली जलाने से स्थिति और खराब हो जाती है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि दिल्ली-एनसीआर में परिवहन सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। स्थानीय स्तर पर होने वाले प्रदूषण के साथ-साथ पराली जलाने की समस्या पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने एनसीआर में परिवहन, ऊर्जा और कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण को भी प्रमुख समस्याओं में गिनाया।

किसानों को मशीन देने भर से नहीं रुकेगी पराली जलाने की समस्या
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह वह समय है जब किसान अगली फसल की बुवाई करते हैं। ऐसे में पराली जलाने की समस्या रुक जानी चाहिए। इस पर अपराजिता सिंह ने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें उपलब्ध कराने भर से समस्या हल नहीं होगी। कई किसानों के पास मशीन चलाने के लिए ईंधन खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। इसके अलावा छोटे खेतों में इन मशीनों का इस्तेमाल करना भी मुश्किल होता है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने इस दौरान कहा कि अधिकारियों की ओर से एक निश्चित दर पर पराली खरीदने का प्रस्ताव भी दिया गया था।

अमीर वर्ग की गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर भी सवाल
सुनवाई के अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय समाज के दूसरे वर्गों की भूमिका पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल उठाया कि संभ्रांत और अमीर वर्ग के लोगों के वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं? इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने साफ संकेत दिया कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए पराली जलाने के अलावा परिवहन और स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

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