एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के बीच सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की तरफ से एआई से तैयार याचिकाओं पर चिंता जताई। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ याचिकाओं में गैर-मौजूद फैसलों और फर्जी उद्धरणों का हवाला दिया जा रहा है, जिससे अदालत पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
एक तरफ भारत दुनिया के सबसे बड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सम्मेलन एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की मेजबानी कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने एआई के गलत इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले एक पीठ ने कहा कि कुछ वकील याचिकाएं तैयार करने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ऐसी याचिकाएं दाखिल हो रही हैं जिनमें ऐसे फैसलों का हवाला दिया गया है जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं।
पीठ में शामिल जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस पर चिंता जताई। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कई बार असली फैसलों का नाम दिया जाता है, लेकिन उनमें फर्जी उद्धरण जोड़ दिए जाते हैं, जिससे जांच करना मुश्किल हो जाता है और जजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मुख्य न्यायाधीश ने एक मामले का दिया उदाहरण
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में भी ऐसे कई मामलों का हवाला दिया गया था, जो असल में मौजूद नहीं थे। जस्टिस बागची ने कहा कि कानूनी ड्राफ्टिंग की कला में गिरावट आई है। कई याचिकाओं में सिर्फ पुराने फैसलों के लंबे-लंबे उद्धरण होते हैं, लेकिन अपने तर्क बहुत कम होते हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत राजनीतिक भाषणों को लेकर दिशा-निर्देश मांगने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।