रेलवे टॉयलेट से हटाएगा चेन वाले मग।
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रेल मंत्रालय ने सभी रेलवे जोनल को निर्देश दिया है कि ट्रेनों के टॉयलेट में फर्श के पास लगे पानी के नल और चेन से बंधे स्टेनलेस स्टील के मग को हटा दें। उनकी जगह जेट स्प्रे लगाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला उत्तर रेलवे जोन में सफल ट्रायल के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य टॉयलेट में पानी जमा होने की समस्या कम करना और साफ-सफाई के मानकों को बेहतर बनाना है।
रेलवे ने बताया क्यों हटाए चेन वाले मग?
मंगलवार को जारी सर्कुलर में मंत्रालय ने कहा कि शौचालय के फर्श पर पानी जमा होने से गंदगी फैलती है और यात्रियों से लगातार नकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। समय के साथ फर्श असमतल हो जाता है, जिससे पानी के छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं और पानी ठहर जाता है। मंत्रालय ने बताया कि उत्तर रेलवे के दिल्ली और अंबाला मंडलों ने शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में इस व्यवस्था का सफल परीक्षण किया। इसके तहत फर्श के पास लगे नलों को डमी प्लग से बंद किया गया और चेन वाले स्टील मग हटा दिए गए। साथ ही हेल्थ फॉसेट (जेट स्प्रे) सही तरीके से लगाए गए।
इस बदलाव से शौचालय का फर्श सूखा और साफ रखने में सुधार देखा गया। पानी जमा होने की शिकायतों में भी कमी आई है। इसी अनुभव के आधार पर सभी जोन को सलाह दी गई है कि वे अपनी चुनी हुई दस ट्रेनों के एसी कोचों में इस व्यवस्था को पायलट परियोजना के रूप में लागू करें।
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रेलवे ने तीन महीने बाद मांगे फीडबैक
मंत्रालय ने तीन महीने के ट्रायल के बाद अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक भी मांगा है। इससे पहले उत्तर रेलवे ने मंत्रालय को बताया था कि 182 शताब्दी कोचों में पहले ही जेट स्प्रे लगाए जा चुके हैं, जिनमें फर्श के पास के नल और चेन वाले मग हटा दिए गए हैं।
वहीं सफाई और रखरखाव में लगे हाउसकीपिंग स्टाफ का कहना है कि जेट स्प्रे लगाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इन मानकों को बनाए रखने के लिए खराब उपकरणों की समय पर मरम्मत और बदलने की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।