सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के निजी डिजिटल उपकरणों की तलाशी, जब्ती (सर्च एंड सीजर) के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने में केंद्र सरकार की ओर से की जा रही देरी पर नाराजगी जताई।
केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए और समय की जरूरत बताई। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने बताया कि इस संदर्भ में एक समिति का गठन किया गया है। केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए और अधिक समय की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि काम सकारात्मक तरीके से चल रहा है।
हालांकि, जस्टिस कौल ने इस तरह के दिशा-निर्देश की मांग करने वाली याचिका दायर करने के बाद से सरकार की ओर से दो साल की देरी पर सवाल उठाया। जस्टिस कौल ने कहा कि हमने नोटिस कब जारी किया? दो साल बीत चुके हैं। कुछ समय सीमा का पालन करना होगा।
2022 में शीर्ष अदालत ने जवाब दाखिल करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2022 में केंद्र सरकार से शिक्षाविदों की याचिका पर फिर से जवाब दाखिल करने को कहा था क्योंकि उसका जवाबी हलफनामा अधूरा और संतोषजनक नहीं था। नवंबर 2022 में कोर्ट ने जवाब दाखिल न करने के लिए सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अगले सप्ताह तक तैयार हो जाएंगे दिशा-निर्देश: केंद्र
सुनवाई के दौरान बुधवार को याचिकाकर्ताओं के वकील नित्या रामकृष्णन ने दिशा-निर्देशों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने दिशा-निर्देश तैयार करने के संबंध में सरकार के आश्वासनों पर संदेह व्यक्त करते हुए स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया।
हालांकि, एएसजी राजू ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि दिशा-निर्देश अगले सप्ताह तक तैयार हो जाएंगे। इसके बाद कोर्ट ने राजू को इसे पूरा करने का निर्देश देते हुए मामले को 14 दिसंबर को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।