कोर्ट ने कहा, इससे महिला कैदियों से संबंधित मुद्दों पर समग्रता से विचार किया जा सकेगा। पीठ न्याय मित्र की 1,382 जेलों में अमानवीय स्थिति में रह रही महिला कैदियों की शीर्षक वाली रिपोर्ट मामले की सुनवाई कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर की जेलों के बुनियादी ढांचे और मौजूदा क्षमता का आकलन करने के लिए गठित की जाने वाली जिला स्तरीय समितियों का दायरा बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कहा, इससे महिला कैदियों से संबंधित मुद्दों पर समग्रता से विचार किया जा सकेगा। पीठ न्याय मित्र की 1,382 जेलों में अमानवीय स्थिति में रह रही महिला कैदियों की शीर्षक वाली रिपोर्ट मामले की सुनवाई कर रही है।
विज्ञापन
न्याय मित्र के रूप में शीर्ष अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने अपने आवेदन का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल के अधिकारियों से प्राप्त विवरण के अनुसार, चार वर्षों में राज्य की जेलों में 62 बच्चों का जन्म हुआ और उन्हें जन्म देने वाली अधिकतर महिला कैदी गर्भवती थीं।
पीठ को सूचित किया गया कि राज्य में महिला जेलों या बैरक में केवल महिला कर्मचारी तैनात हैं और सभी जेलों में सीसीटीवी कैमरे हैं। पीठ ने कहा, इसके बावजूद अगर कुछ हो रहा है तो यह बदतर है।