याचिका में कहा गया था, ''दिल्ली हाईकोर्ट ने गलत तरीके से और बिना किसी औचित्य के याचिका को गलत इरादे से प्रेरित और वास्तविक की कमी के रूप में मानते हुए याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वास्तविक इरादे को गलत तरीके से ले लिया।''
याचिका में यह भी दावा किया गया था कि हाईकोर्ट ने संसद के संप्रभु कार्यों के संचालन के महत्व पर विचार तो किया, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए राज्य के संप्रभु कर्तव्य की अनदेखी की, जोकि संविधान के अनुच्छेद- 21 का अभिन्न अंग है।
बता दें कि गत वर्ष 20 मार्च को केंद्र सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए लैंड यूज में बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी की थी। यह अधिसूचना मध्य दिल्ली में 86 एकड़ भूमि से संबंधित है जिसमें राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय जैसी बिल्डिंग शामिल हैं।