मणिपुर लंबे जातीय संघर्ष से जूझ रहा है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकार से लोगों के लिए भोजन, दवाएं उपलब्ध कराने के इंतजाम करने को कहा है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में आर्थिक नाकेबंदी का सामना कर रहे लोगों को भोजन और दवाओं जैसी बुनियादी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने राज्य सरकार से इससे निपटने के लिए सभी विकल्प तलाशने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर हेलिकॉप्टर से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जाए। इससे पहले, मामले के मानवीय पहलुओं से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित न्यायाधीशों की समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने पीठ को दो मुद्दों की जानकारी दी थी।
समिति की तरफ से बताया गया कि मणिपुर के मोरेह क्षेत्र में नाकाबंदी के कारण लोग खाने-पीने की सामान्य चीजों से वंचित हैं। दूसरा, कुछ राहत शिविरों में खसरा और चिकनपॉक्स का प्रकोप है। शुरुआत में सीजेआई ने अरोड़ा से पूछा कि समिति सीधे सरकार तक पहुंचने की बजाय अदालत के सामने क्यों पेश हो रही है। इसके बाद सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता को समिति में नियुक्त नोडल अधिकारियों का औपचारिक नोटिस भेजने का निर्देश दिया ताकि समिति सीधे सरकार तक पहुंच सके।
इस पर प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने हस्तक्षेप किया और कहा कि जब नाकेबंदी की बात आई तो समिति कुछ नहीं कर सकी। एसजी ने इसमें यह भी कहा कि यह समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, मोरेह क्षेत्र में भोजन नहीं है। समस्या नाकाबंदी है। समिति सशस्त्र बलों को नाकाबंदी हटाने का निर्देश नहीं दे सकती, अन्यथा हम खाद्य आपूर्ति प्रदान कर सकते हैं।
जमीनी हकीकत का मूल्यांकन करे सरकार
सीजेआई ने कहा कि नाकाबंदी एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है जिस पर सावधानीपूर्वक के साथ विचार करने की जरूरत है क्योंकि ये नाकाबंदी अक्सर स्थानीय लोगों या समूहों की तरफ से की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत का मूल्यांकन करने के बाद स्थिति से निपटने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। एक अन्य वकील ने अदालत से इस बात पर ध्यान देने का आग्रह किया कि इस तरह की नाकाबंदी न केवल मोरेह बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (जो दीमापुर से इंफाल तक चलती है) सहित अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रही है। इसके बाद ही पीठ ने केंद्र और मणिपुर सरकार को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।