सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को निर्देश दिया है कि वे एक केंद्रीयकृत डैशबोर्ड और सीसीटीवी मानकीकरण से जुड़ी बैठक में अनिवार्य रूप से भाग लें। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे द्वारा दी गई दलीलों के बाद यह आदेश पारित किया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश एमिकस क्यूरी (न्यायालय का मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे की दलील पर दिया। दवे ने बताया कि 21 फरवरी को हुई बैठक में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और कुछ राज्य शामिल नहीं हुए, जिससे रिपोर्ट दाखिल नहीं हो सकी।
इस दलील पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि भारत सरकार के वकील ने पहले ही क्षमा मांग ली है कि संचार में कुछ गड़बड़ी के कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि अगली बैठक में वे पूरा सहयोग देंगे।
14 मार्च, 2026 को होगी बैठक
पीठ ने कहा कि अतिरिक्त मित्र ने बैठक के लिए 14 मार्च, 2026 की तारीख सुझाई है। बैठक पहले दिए गए निर्देशानुसार 14 मार्च, 2026 को आयोजित की जाए। कोर्ट ने कहा कि अगली बैठक 14 मार्च 2026 को होगी और सभी पक्षों को सहयोग करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पुलिस थानों में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने के लिए सीसीटीवी लगाने का आदेश दिया था।
पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का आदेश
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए पुलिस स्टेशनों में कार्यात्मक सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में मानवाधिकारों के हनन की जांच के लिए पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था।
जानिए सुप्रीम कोर्ट का क्या था निर्देश
दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सीबीआई, ईडी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था। इसमें कहा गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पुलिस स्टेशन में, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर, मुख्य द्वार पर, लॉक-अप में, गलियारों में, लॉबी और रिसेप्शन में, साथ ही लॉक-अप कमरों के बाहर के क्षेत्रों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि कोई भी हिस्सा बिना सुरक्षा के न रह जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी सिस्टम में नाइट विजन की सुविधा होनी चाहिए और उसमें वीडियो के साथ-साथ ऑडियो फुटेज भी होनी चाहिए। अदालत ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसे सिस्टम खरीदना अनिवार्य कर दिया है, जो कम से कम एक वर्ष तक डेटा स्टोर करने की सुविधा प्रदान करते हों।
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