सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में रिक्त पदों की स्थिति को ‘स्तब्ध’ करने वाला बताया है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सरकार को निर्देश दिया कि वह अगले छह महीने में सारी रिक्तियों को एक ही बार में अधिसूचित करे। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना की पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि आज की स्थिति के अनुसार, एनजीटी में करीब 14 पद (सात न्यायिक सदस्यों के और सात तकनीकी सदस्यों के) रिक्त हैं।
पीठ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण कानून के प्रावधान के बावजूद यह अधिकरण इस समय सिर्फ सात न्यायाधीशों (एक अध्यक्ष, तीन न्यायिक और तीन तकनीकी सदस्यों) के साथ ही काम कर रहा है। इस कानून में प्रावधान है कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इसमें दस से कम सदस्य न हों। पीठ ने कहा कि यह राष्ट्रीय हरित अधिकरण जैसी प्रमुख संस्थान की चिंताजनक स्थिति है क्योंकि इसे पर्यावरण के मसलों को देखना होता है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह केंद्र सरकार के जवाब के प्रति सचेत है जिसमें यह आवश्वासन दिया गया है कि नौ रिक्तियों को भरने के लिए जुलाई, 2020 तक अधिसूचना जारी की जा रही है। पीठ ने कहा, हमारी राय में यह पर्याप्त नहीं है। हम केंद्र सरकार को यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि वह एक ही बार में सारी मौजूदा रिक्तियों (न्यायिक और तकनीकी सदस्यों के सात सात पद) और अगले छह महीने में होने वाली संभावित रिक्तियों को अधिसूचित करे।