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सुप्रीम कोर्ट : दाऊद के भांजे को जबरन वसूली मामले में जमानत से अदालत का इनकार

Thu, 05 May 2022 04:21 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें इस स्टेज पर याचिकाकर्ता को जमानत देने की कोई वजह नहीं दिखाई पड़ती है। जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भांजे को जबरन वसूली मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया। एक बिल्डर को जबरन वसूली के लिए धमकाने के लिए उसके खिलाफ 2019 में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया था।  

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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने ट्रायल कोर्ट को मामले में आरोप तय करने को कहा। साथ ही दाऊद के भांजे को इसके बाद जमानत के लिए नए सिरे से आवेदन करने की इजाजत दी। पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के दिसंबर 2021 के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने दाऊद के भांजे मोहम्मद रिजवान इकबाल हसन शेख इब्राहिम कास्कर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। 

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें इस स्टेज पर याचिकाकर्ता को जमानत देने की कोई वजह नहीं दिखाई पड़ती है। जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। हम ट्रायल कोर्ट को आरोपी के खिलाफ छह महीने के अंदर आरोप तय करने का निर्देश देते हैं। इसके बाद आरोपी इस अदालत के समक्ष जमानत के लिए आ सकता है। कास्कर को जुलाई 2019 में गिरफ्तार किया गया था। 10 अक्तूबर 2019 को पुलिस ने मकोका के तहत अपनी चार्जशीट दाखिल की थी। 
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मामले के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक सामान के आयात का भी कारोबार करने वाले बिल्डर ने कहा था कि उनके कारोबारी पार्टनर ने उनसे 15 लाख रुपये लिए थे। जून 2019 में उन्हें वांटेंड गैंगस्टर छोटा शकील की तरफ से वांछित आरोपी और गैंग के सदस्य फहीम मचमच की ओर से फोन आया कि वह भुगतान के लिए जोर न डालें। बिल्डर की शिकायत पर शकील, कास्कर और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

टीडीसैट में एक सदस्य की नियुक्ति न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा है जिसमें एक आवेदक ने दूरसंचार विवाद और निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) के सदस्य के पद पर अपनी नियुक्ति के लिए निर्देश देने की मांग की है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने केंद्र सरकार को आवेदक एएम अलंकामोनी की नियुक्ति नहीं करने के कारणों को स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है।

 पीठ ने कहा, अदालत को उन कारणों से अवगत कराया जाना चाहिए जो एससीएससी (खोज सह चयन समिति) द्वारा की गई सिफारिश के बावजूद मई 2020 की रिक्ति अधिसूचना के तहत आवेदक की नियुक्ति नहीं की गई। सुनवाई की अगली तारीख से पहले संबंधित फाइलें अदालत के समक्ष पेश की जा सकती हैं।

आवेदक के वकील विकास सिंह ने तर्क दिया कि जस्टिस नागेश्वर राव के नेतृत्व वाली समिति ने टीडीसैट सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए आवेदक के नाम की सिफारिश की थी जिसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। आवेदक एएम अलंकामोनी वर्तमान में हैदराबाद में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में एक लेखाकार सदस्य के रूप में तैनात हैं।

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