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हल्लाबोल: प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की जगह कोई नया स्थान तय करे सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा?

Fri, 09 Oct 2026 07:15 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जंतर-मंतर के अलावा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए किसी नई जगह की पहचान करने को कहा है, जहां शौचालयों व एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकें।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार से कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी दूसरी जगह को तय करने पर विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और कुछ छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के कारण मेट्रो स्टेशनों पर प्रस्तावित पाबंदियों और राजधानी आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं वाली जगह की जरूरत पर जोर दिया।
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सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने यह बात तब कही जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सक्षम अधिकारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी दूसरी जगह की पहचान करने पर विचार करेंगे। शीर्ष सरकारी वकील ने बेंच से इस बात को अपने आदेश में दर्ज करने का आग्रह किया और बताया कि सीनियर वकील कपिल सिब्बल भी इस सुझाव से सहमत थे। बेंच ने कहा, 'सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी दिया गया और सभी पक्षों के सीनियर वकील/वकील इस बात पर सहमत थे कि अब समय आ गया है कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध करने वालों के लिए ऐसी उपयुक्त जगह की पहचान की जाए और उसे तय किया जाए जहां सभी बुनियादी सुविधाएं दी जा सकें। सक्षम अधिकारी इस सुझाव पर विचार करें और उचित निर्णय लें।' कार्यवाही के दौरान, बेंच को बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने सीजेपी और इंडियन यूथ कांग्रेस को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
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बेंच को यह भी बताया गया कि रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन करने की संभावना पर भी विचार नहीं किया गया था। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही थी, तो अधिकारी प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में इकट्ठा होने की अनुमति दे सकते थे।
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सीजेआई ने जाहिर की चिंता
सीजेआई ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों की ओर इशारा किया और कहा कि आस-पास सरकारी आवास और कुछ सांसदों के घर हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वहां सरकारी आवास हैं। कुछ सांसद सामने वाली लेन में रहते हैं। प्रदर्शनकारियों को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें वहां शौचालय की सुविधा भी नहीं मिलती है। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल ने उस जगह पर इमरजेंसी मेडिकल मदद पहुंचाने में आने वाली दिक्कतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रदर्शनकारी बीमार पड़ जाता है, तो एम्बुलेंस को वहां पहुंचने में परेशानी हो सकती है। आदेश लिखवाए जाने के बाद, सरकारी वकील ने फिर से कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शन के लिए कोई दूसरी जगह तय करने पर विचार करेगी।
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