सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजद्रोह (भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए) कानून की वैधता को परीक्षण करने का निर्णय लिया है। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने दो पत्रकारों द्वारा दायर इस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
मणिपुर के किशोरचंद्र वांगखेमचा और छत्तीसगढ़ के कन्हैया लाल शुक्ला द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि धारा-124 ए, संविधान के तहत मिले बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिकर्ताओं ने धारा-124ए को असंवैधानिक करार देने की गुहार लगाई गई है। सनद रहे कि करीब तीन महीने पहले शीर्ष अदालत ने इसी प्रावधान को चुनौती देने वाली तीन वकीलों की याचिका को खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता वांगखेम और शुक्ला ने याचिका में कहा है कि उनपर उनके राज्यों में कि धारा-124 ए के तहत मुकदमे दर्ज किए थे। फेसबुक पर की गई टिप्पणी और कार्टून शेयर करने के आरोप में उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। उनका कहना है कि यह धारा-124ए का दुरुपयोग है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद-19 (1) (ए) के तहत प्राप्त बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का साफतौर पर उल्लंघन है।