देश की सर्वश्रेष्ठ जांच एजेंसी कही जाने वाली सीबीआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन लोगों के लिए एक नजीर की तरह है, जो इस केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में गैर-जरुरी हस्तक्षेप कर अपना राजनीतिक दुस्साहस दिखा रहे थे। दो निदेशकों की लड़ाई में इस जांच एजेंसी की गरिमा और साख जो धक्का लगा था, सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को दोबारा से दफ्तर ज्वाइन करा कर उसे काफी हद तक बचा लिया है।
कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं। यह केंद्र सरकार के लिए सबक है। आज आप इन एजेंसियों का इस्तेमाल लोगों पर दबाव डालने के लिए करेंगे तो कल कोई और यह सब करेगा।ऐसे में फिर लोकतंत्र का क्या होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने का फैसला निरस्त कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने कहा है कि वर्मा अभी नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे। अभी वे रोजाना के कामकाज में प्रशासनिक फैसले ही लेंगे। इस फैसले के बाद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, सरकार ने पहले भी सीबीआई की विश्वसनीयता, स्वायत्तता और प्रतिष्ठता बनाए रखने का प्रयास किया था।
इसी वजह से आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजा गया था। दोनों अफसरों की लड़ाई से जांच एजेंसी की साख खराब हो रही थी।सीवीसी ने इस मामले में जो रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी, उसी आधार पर सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी सीजेआई, प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष वाली सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाएगा। सेलेक्ट कमेटी आगे का फैसला लेगी कि वर्मा को पद से हटाया जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने कहा, वर्मा को नीतिगत फैसले लेने से रोकना गलत है। ऐसा कोई कानून या नियम नहीं है, जिसमें यह बात कही गई हो।