फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना एक नजीर

Tue, 08 Jan 2019 03:09 PM IST
पूजा मेहरोत्रा जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
विज्ञापन
आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

देश की सर्वश्रेष्ठ जांच एजेंसी कही जाने वाली सीबीआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन लोगों के लिए एक नजीर की तरह है, जो इस केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में गैर-जरुरी हस्तक्षेप कर अपना राजनीतिक दुस्साहस दिखा रहे थे। दो निदेशकों की लड़ाई में इस जांच एजेंसी की गरिमा और साख जो धक्का लगा था, सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को दोबारा से दफ्तर ज्वाइन करा कर उसे काफी हद तक बचा लिया है।

विज्ञापन


कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं। यह केंद्र सरकार के लिए सबक है। आज आप इन एजेंसियों का इस्तेमाल लोगों पर दबाव डालने के लिए करेंगे तो कल कोई और यह सब करेगा।ऐसे में फिर लोकतंत्र का क्या होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने का फैसला निरस्त कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने कहा है कि वर्मा अभी नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे। अभी वे रोजाना के कामकाज में प्रशासनिक फैसले ही लेंगे। इस फैसले के बाद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, सरकार ने पहले भी सीबीआई की विश्वसनीयता, स्वायत्तता और प्रतिष्ठता बनाए रखने का प्रयास किया था। 
विज्ञापन


इसी वजह से आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजा गया था। दोनों अफसरों की लड़ाई से जांच एजेंसी की साख खराब हो रही थी।सीवीसी ने इस मामले में जो रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी, उसी आधार पर सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी सीजेआई, प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष वाली सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाएगा। सेलेक्ट कमेटी आगे का फैसला लेगी कि वर्मा को पद से हटाया जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने कहा, वर्मा को नीतिगत फैसले लेने से रोकना गलत है। ऐसा कोई कानून या नियम नहीं है, जिसमें यह बात कही गई हो।

विज्ञापन

हर क्षण खराब हो रही थी सीबीआई की छवि, राजनेताओं ने इसे पुलिस चौकी तक कहा था 

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना का मामला सार्वजनिक होने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी की छवि बुरी तरह धूमिल हुई थी।राजनेताओं ने इसे पुलिस चौकी तक कह दिया था।इसे भ्रष्टाचार का अड्डा तक कहा गया।सीबीआई ने सबूतों के आधार पर अगर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की तो उसे राजनीतिक रंग दे दिया गया।यहां तक कि आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तो सीबीआई टीम को अपने राज्य में रेड डालने से रोक दिया था।उनका कहना था कि जांच एजेंसी की कोई साख नहीं है। 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे मोदी पुलिस और मोदी एजेंसी कहा था।इसी तरह अब पिछले सप्ताह यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कथित तौर पर एक माइनिंग घोटाले में नाम सामने के बाद सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर मोदी सरकार पर हमला बोला था। इन नेताओं का कहना था कि मोदी सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है।

आलोक वर्मा का आना, मतलब मोदी पर कलंक: केजरीवाल 


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल किया जाना प्रधानमंत्री पर सीधे कलंक लगना है।मोदी सरकार ने हमारे देश के सभी संस्थानों तथा लोकतंत्र को बर्बाद कर दिया है।क्या सीबीआई निदेशक को आधी रात को गैरकानूनी तरीके से राफेल घोटाले की जांच रोकने के लिए नहीं हटाया गया, जो सीधे प्रधानमंत्री तक जाती है?
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें