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अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले कानून का परीक्षण करेगा सुप्रीम कोर्ट

Fri, 16 Feb 2018 03:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2006 और इसके बाद के कानूनों का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि दिल्ली में अनधिकृत निर्माण को संरक्षण देने वाले विशेष कानून सही है और जल्द ही हलफनामे के जरिए यह बताएगी कि यह कानून कैसे सही है।

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गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एएनएस नादकरणी ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति नवीन गुप्ता की पीठ के समक्ष कहा कि उनके पास फिलहाल इस मामले से संबंधित पूरे दस्तावेज मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेजों को देखने के बाद सरकार हलफनामे के जरिए अपना जवाब देगी।

उन्होंने कहा कि सरकार आधा-अधूरा जवाब नहीं देना चाहती। उन्होंने पीठ के इसके लिए वक्त देने की मांग की। इस पर पीठ ने कहा कि हमें सीलिंग से कोई लेना-देना नहीं है। सीलिंग का काम देखना निगम का है। 
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वहीं अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि यह मसला 2006 का है और आश्चर्य की बात है कि 12 वर्ष बाद भी केंद्र सरकार इस मसले पर हलफनामा दायर करना चाहती है। इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार के हिसाब से इस देरी की वजह सुप्रीम कोर्ट है। हालांकि, पीठ ने केंद्र सरकार को तीन हफ्ते का समय देते हुए सुनवाई दो अप्रैल तक के लिए टाल दी। 

पीठ ने साथ ही यह भी कहा कि वह इस मसले को लेकर किसी याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें नहीं सुनेगी। अगर याचिकाकर्ताओं को कुछ कहना होगा तो वे अमाइकस क्यूरी के माध्यम से कह सकते हैं। पीठ ने कहा कि वह इस मसले पर केंद्र सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली सरकार और निगम को सुनेगी।

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