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Election Freebies: चुनावी खैरात को सुप्रीम कोर्ट ने माना गंभीर मुद्दा, कहा- बुनियादी ढांचे पर खर्च हो यह पैसा

Thu, 11 Aug 2022 08:49 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने आज मामले की आगे सुनवाई की, लेकिन साफ कहा कि वह आज फैसला नहीं सुनाएगी। सभी पक्षों के सुझावों पर विचार करेगी, इसके बाद ही फैसला दिया जाएगा। मामले में 17 अगस्त को आगे सुनवाई होगी। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
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विस्तार
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चुनावों के वक्त मुफ्त में चीजें देने के राजनीतिक दलों के वादों और मुफ्त बिजली व पानी वितरण (freebies) को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर मुद्दा माना है। शीर्ष कोर्ट के दो जजों की पीठ ने आज करीब 20 मिनट तक इसे चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। याचिका में चुनावी खैरात पर पाबंदी की मांग करते हुए इस पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने आज मामले की आगे सुनवाई की, लेकिन साफ कहा कि वह आज फैसला नहीं सुनाएगी। सभी पक्षों के सुझावों पर विचार करेगी, इसके बाद ही फैसला दिया जाएगा। मामले में 17 अगस्त को आगे सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दलों द्वारा मुफ्त में चीजें व सेवाएं देने का वादा करना और वितरित करना गंभीर मसला है। यह पैसा बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाना चाहिए। पैसे गंवाना और लोगों की भलाई के कामों में संतुलन होना चाहिए। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से अपने सुझाव देने को कहा। 
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आप ने दी यह दलील
आम आदमी पार्टी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले में विशेषज्ञ समिति के गठन को गैर जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं और मुफ्त में चीजें देने में अंतर है। 
 


कुछ पार्टियों ने इसे कला के स्तर पर पहुंचाया : केंद्र
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, हाल में कुछ पार्टियों ने मुफ्त उपहार बांटने को एक कला के स्तर पर पहुंचा दिया है। चुनाव अब सिर्फ इसी के सहारे लड़े जा रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के चुनावी परिदृश्य में कुछ राजनीतिक दल यह मान बैठे हैं कि मुफ्त में चीजें देना समाज के कल्याण का एक मात्र उपाय है। यह सोच पूरी तरह अवैज्ञानिक और आर्थिक आपदा की ओर ले जाने वाली है।

इस संबंध में उन्होंने बिजली क्षेत्र का उदाहरण दिया और कहा कि अधिकांश बिजली उत्पादन और वितरण कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां हैं और बेहद गंभीर वित्तीय दबाव में हैं। मेहता ने कहा कि इस बारे में जब तक विधायिका या चुनाव आयोग कुछ नहीं करता, शीर्ष कोर्ट को देशहित में राजनीतिक दलों के लिए ‘करने या नहीं करने’ जैसी चीजें तय करनी चाहिए।

मुफ्त रेवड़ियों पर विधायिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं करेंगे अतिक्रमण : सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस एनवी रमण ने बृहस्पतिवार को कहा, चुनाव की प्रक्रिया के दौरान विवेकहीन तरीके से मुफ्त उपहारों के वादे का मुद्दा गंभीर है लेकिन हम इस बारे में कानून की कमी के बावजूद विधायिका के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं करेंगे। जस्टिस रमण ने कहा, आप मुझे अनिच्छुक या पुरातनपंथी कह सकते हैं लेकिन मैं विधायिका के क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं करना चाहता। मैं एक सख्त परंपरावादी हूं।

उन्होंने कहा, यह एक गंभीर विषय है। यह आसान नहीं है। हमें दूसरों को भी सुनने दीजिए। ऐसा कोई होना चाहिए जो अपनी दृष्टि और विचार इस पर रख सके। कृपया मेरे रिटायरमेंट से पहले ऐसा कोई विचार मेरे सामने रखें। 26 अगस्त को रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस ने कहा, कुछ वरिष्ठ वकीलों ने सुझाव रखे हैं। अन्य पक्ष भी 17 अगस्त तक अपनी राय दे सकते हैं।

चुनाव आयोग को फटकार
चीफ जस्टिस ने चुनाव आयोग का हलफनामा अखबार में छपने पर आयोग को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, आयोग का जवाबी हलफनामा अखबारों में छप गया और जजों को यह बीती रात तक नहीं मिला था। कृपया हलफनामा सिर्फ अखबारों को ही दें।

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