हिमाचल प्रदेश के कसौली में होटल व रिसॉर्ट मालिकों द्वारा अतिक्रमण के मसले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से वकील से कहा कि वह सरकार का 'चम्मच’ न बनें।
वास्तव में सरकार की ओर से पेश वकील अभिनव मुखर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट केएक जज की पत्नी ने इसी तरह की जनहित याचिका हाईकोर्ट में डाल रखी है लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को इस मसले पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार केवकील से कहा, 'निहित स्वार्थ केलिए प्रवक्ता न बने। आप वकील होने के साथ-साथ कोर्ट के ऑफिसर भी हैं। राज्य सरकार का 'चम्मच’ न बनें आप।’
इससे पहले राज्य सरकार के वकील ने कहा कि न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पत्नी ने इससे संबंधित जनहित याचिका हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की है। लिहाजा पीठ को इस याचिका पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए। मालूम हो कि न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी सुनवाई कर रही पीठ का हिस्सा हैं।
वकील के इस आपत्ति पर पीठ ने वकील से कहा, 'क्या आपने उस जनहित याचिका पढ़ी है।’ पीठ ने कहा कि वह जनहित याचिका वन भूमि पर अतिक्रमण से जुड़ा है। इसके बाद पीठ ने राज्य सरकार को कसौली में होटल व रिसॉर्ट मालिकों द्वारा किए गए अतिक्रमण को ढहाने संबंधित निर्देशों पर दो महीने में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।
मालूम हो कि अतिक्रमण ढहाने के आदेश का पालन करनी पहुंची टीम की एक महिला अधिकारी की एक होटल मालिक ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।