सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या पर चिंता जताते हुए इनके खिलाफ चल रहे केसों के जल्द निपटारे के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। जेलों में बंद कैदियों में 67 फीसदी विचाराधीन हैं। कोर्ट अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी को 2019 के शुरुआती छह महीनों में हर महीने बैठक कर केसों की समीक्षा करने को कहा है।
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (एनएएलएसए) ने बताया कि पिछले साल 31 दिसंबर तक देश की जेलों में कैदियों की रखने की क्षमता करीब 3.78 लाख थी, जबकि कैदियों की वास्तविक संख्या 4.19 लाख थी। अथॉरिटी ने बताया कि जेलों में बंद ज्यादातर कैदी विचाराधीन हैं।