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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समकक्ष पीठ का फैसला हाईकोर्ट के लिए बाध्यकारी, पढ़ें पूरी खबर

Fri, 05 Jan 2024 06:15 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने न्यायिक अनुशासन के महत्व पर बल देते हुए यह बात कही। पीठ ने कहा, न्यायिक अनुशासन और औचित्य के नियम और 'उद्धरणों के सिद्धांत में यह क्षमता है कि इनसे न्यायिक निर्णयों में निश्चितता और स्थिरता को बढ़ावा मिल सके।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहलवानों की याचिका पर सुनवाई बंद की - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान किसी पीठ के सामने जब उसी हाईकोर्ट की समकक्ष पीठ के फैसले को नोटिस में लाया जाए तो उस फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए और वह फैसला संबंधित पीठ के लिए बाध्यकारी होगा। हालांकि ऐसे में जजों की समान संख्या वाली पीठ को यह अधिकार होगा कि वह मामले में अपनी भिन्न राय रखे और मामले को बड़ी पीठ को संदर्भित करे। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक दीवानी मामले में सुनाए फैसले में यह बात कही।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने न्यायिक अनुशासन के महत्व पर बल देते हुए यह बात कही। पीठ ने कहा, न्यायिक अनुशासन और औचित्य के नियम और 'उद्धरणों के सिद्धांत में यह क्षमता है कि इनसे न्यायिक निर्णयों में निश्चितता और स्थिरता को बढ़ावा मिल सके। इससे लोगों को उनके कार्यों के परिणाम के बारे में आश्वासन मिलता है। ऐसे में समान क्षमता वाली पीठ के पास फैसले को बड़ी पीठ के पास भेजने का विकल्प ही बचता है। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट की एक पीठ ने 1990 में जो फैसला सुनाया था उसे बाद में समान क्षमता वाली एक पीठ ने दूसरे अपील में खारिज कर दिया था। ऐसे में यह मामला सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में आया था।

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