गोधरा में वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे तीन दोषियों को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, यह बहुत ही गंभीर घटना थी। यह किसी एक व्यक्ति की अकेली मौत का मामला नहीं है। पीठ ने तीनों दोषियों को भले ही इस स्तर पर जमानत देने से मना किया हो, पर दोषियों की अपील को एक पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने पर सहमति जता दी।
अपील अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं
पीठ ने कहा, दोषियों की विशिष्ट भूमिका को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर हम इन व्यक्तियों को जमानत पर रिहा करने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि इससे उनके अपील के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीठ ने कहा, वह अपील को विचार के लिए सूचीबद्ध करना चाहेगी, क्योंकि यह अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रह सकती।
आठ दोषियों को दी थी जमानत
59 लोगों को जलाया गया था जिंदा
गुजरात सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि यह दुर्लभतम मामला है, जहां महिलाओं और बच्चों सहित 59 लोगों को जिंदा जला दिया गया था। 15 दिसंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गोधरा ट्रेन जलाने के मामले में एक दोषी को इस आधार पर जमानत दे दी कि वह महज एक पत्थरबाज था।