सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नाम आगे बढ़ाए हैं। प्रस्तावित बदलावों के तहत दिल्ली, बॉम्बे और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को अलग-अलग हाईकोर्ट की जिम्मेदारी सौंपने की सिफारिश की गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को भी वहीं मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पटना, कलकत्ता, बॉम्बे और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के पद के लिए चार न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया, "6 अगस्त 2026 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में नीचे बताए गए न्यायाधीशों को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की गई है।"
किन न्यायाधीशों की कहां नियुक्ति की सिफारिश की गई?
सिफारिश के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है।
विज्ञापन
कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की भी सिफारिश की है। इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को इसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। उनका मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट है।
किन न्यायाधीशों का होगा तबादला?
एक अलग बयान में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के तबादले की भी सिफारिश की है। बयान के अनुसार, "6 अगस्त 2026 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में निम्नलिखित हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिश की गई है।" सिफारिश के मुताबिक, गुवाहाटी हाईकोर्ट के मूल न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनाश रंजन पाठक का उड़ीसा हाईकोर्ट से गुजरात हाईकोर्ट तबादला करने की सिफारिश की गई है।
कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र का उड़ीसा हाईकोर्ट से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तबादला करने की भी सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की इन सिफारिशों पर अब हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले से संबंधित मौजूदा प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।