सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर्नाटक, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट के लिए जजों की नियुक्ति की नई सिफारिशें की हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने गुरुवार को हुई बैठक में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी।
कॉलेजियम ने न्यायिक अधिकारियों उषारानी, केएस भारत कुमार और नेराले वीरभद्रैया भवानी को कर्नाटक हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
दिल्ली हाईकोर्ट में आठ न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति पर मुहर
दिल्ली हाईकोर्ट के लिए आठ न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की गई है। इनमें गुरविंदर पाल सिंह, निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा-प्रथम, भारत पराशर, डॉ. (श्रीमती) अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया, '10 सितंबर 2026 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रूप में निम्नलिखित न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।'
किन राज्यों के हाईकोर्ट में हुई जजों की नियुक्ति?
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के जज के रूप में न्यायिक अधिकारी यश पाल बॉर्नी की नियुक्ति की भी सिफारिश की गई है। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट के लिए न्यायिक अधिकारियों मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।
हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए लागू प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपने दो सबसे वरिष्ठ जजों से सलाह के बाद नियुक्ति का प्रस्ताव शुरू करते हैं। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सिफारिश मुख्यमंत्री को भेजते हैं, जो इसे राज्यपाल को भेजते हैं। राज्यपाल संबंधित दस्तावेजों और अन्य जानकारियों के साथ प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री को भेजते हैं।
कॉलेजियम की सिफारिश पर कैसे लगती है मुहर?
इसके बाद केंद्र सरकार प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी करती है और इसे भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाता है। सीजेआई हाईकोर्ट के लिए सिफारिश को अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जजों से विचार-विमर्श करते हैं। कॉलेजियम की मंजूरी के बाद सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाती है। नियुक्ति राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर किए जाने और कानून मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा भारत के राजपत्र में अधिसूचना जारी किए जाने के बाद प्रभावी होती है।