ठाणे के दही हांडी कार्यक्रम में मराठी भाषा को लेकर दिए अपने बयान पर विवाद बढ़ता देख अभिनेता संजय दत्त ने महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक को फोन कर सफाई दी है। संजय दत्त ने गुरुवार को फोन पर बातचीत की शुरुआत मराठी अंदाज में 'प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र' के साथ की और स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में कही गई उनकी बात केवल एक हंसी-मजाक था।
उन्होंने कहा कि उन्हें मराठी भाषा बहुत अच्छी तरह आती है और अगर उनके उस बयान से कोई गलत संदेश गया है या किसी को ठेस पहुंची है, तो वे इसका खेद व्यक्त करते हैं।
बॉलीवुड अभिनेता की किस टिप्पणी पर हुआ विवाद?
यह पूरा मामला ठाणे में आयोजित मशहूर दही हांडी उत्सव से जुड़ा है, जिसका आयोजन प्रताप सरनाईक का 'संस्कृति युवा प्रतिष्ठान' करता है। यह महाराष्ट्र के सबसे बड़े दही हांडी आयोजनों में से एक है, जिसमें राजनीति, सिनेमा और खेल जगत की हस्तियां शामिल होती हैं। इस साल भी कार्यक्रम में संजय दत्त, सुनील शेट्टी और क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव जैसे सितारे मौजूद थे।
सरनाईक लंबे समय से मराठी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने का अभियान चलाते रहे हैं। इसी दौरान मंच पर संजय दत्त ने चुटकी लेते हुए मंत्री से कह दिया था कि येरवड़ा जेल में छह साल गुजारने के बावजूद वे मराठी नहीं सीख सके।
संजय दत्त की टिप्पणी ने क्यों पकड़ा तूल?
अभिनेता की यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। कुछ लोगों ने संजय दत्त को निशाने पर लिया तो कुछ ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या मराठी बोलने और सीखने की उम्मीद सिर्फ आम ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों से ही की जाती है?
विवाद को तूल पकड़ता देख संजय दत्त ने गुरुवार को सीधे सरनाईक को फोन मिलाया। बातचीत के दौरान संजय दत्त ने कहा कि वे महाराष्ट्र में ही पले-बढ़े हैं और उनका पूरा परिवार मुंबईकर है। इस राज्य ने उनके परिवार को बहुत कुछ दिया है और वे इस माटी का पूरा सम्मान करते हैं।
सरनाईक से फोन पर संजय दत्त ने की क्या बातचीत?
फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना के दिवंगत संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब वे अपने जीवन के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे थे, तब बालासाहेब उनके और उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहे थे। वे उस मुश्किल समय में मिले सहयोग और समर्थन के लिए बालासाहेब के प्रति हमेशा आभारी रहेंगे।