सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी के लिए पूर्व आईपीएल आयुक्त ललित मोदी के बिना शर्त माफी मांगने के बाद उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही बंद कर दी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में ललित मोदी ने कहा कि भविष्य में वह ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो किसी भी तरह से अदालत या भारतीय न्यायपालिका की महिमा या गरिमा के लिए असंगत हो।
इस पर पीठ ने कहा, हम बिना शर्त मांगी गई इस माफी को स्वीकार करते हैं। ललित मोदी को यह याद दिलाते हैं कि भविष्य में उनकी ओर से न्यायपालिका और अदालतों की छवि को धूमिल करने वाले इस तरह के किसी भी प्रयास को बहुत गंभीरता से देखा जाएगा। पीठ ने कहा, अदालत हमेशा माफ करने पर इत्तेफाक रखती है। ऐसे में इस मामले में बड़ा दिल दिखाते हुए हम इस माफीनामे को स्वीकार करते हैं। ललित मोदी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही को बंद करते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, सभी को संस्था का समग्र रूप से सम्मान करना चाहिए, यही हमारी एकमात्र चिंता थी।
ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ की गई अपनी टिप्पणी पर 18 अप्रैल को माफी मांगी थी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने ललित मोदी को न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने मोदी को उनकी टिप्पणी के लिए फटकार लगाते हुए उन्हें चेतावनी दी कि इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति के गंभीर परिणाम होंगे।
हलफनामे में दिए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं थी अदालत
पीठ ने कहा था कि मोदी कानून और संस्था से ऊपर नहीं हैं। उन्हें माफी मांगने से पहले भारतीय न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने वाली सोशल मीडिया पर भविष्य में कोई पोस्ट नहीं करने की शपथ के साथ एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया था। पीठ ने मामले की सुनवाई 24 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी थी। साथ ही कहा था कि अदालत ने मोदी की ओर से दायर जवाबी हलफनामे का अध्ययन किया है। वह उनकी ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है। न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले मोदी के ट्वीट पर वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें न्यायाधीशों के खिलाफ निंदनीय टिप्पणी की गई थी।