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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नौकरी के दौरान दुर्घटना में घर से कार्यस्थल जाते-आते समय के हादसे भी होंगे शामिल

Tue, 29 Jul 2025 08:28 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नौकरी के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना वाक्यांश में निवास से कार्यस्थल आने जाने के दौरान हादसों को भी शामिल होंगी। बशर्ते दुर्घटना घटित होने की परिस्थितियों, समय और स्थान तथा रोजगार के बीच संबंध स्थापित हो। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम की धारा 3 में प्रयुक्त वाक्यांश "नौकरी के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना" में वे हादसे भी शामिल होंगे जो कर्मचारी के निवास और कार्यस्थल के बीच आने-जाने के दौरान होते हैं।
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न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि कर्मचारियों के मुआवजा अधिनियम 1923 की धारा 3 में प्रयुक्त इस वाक्यांश को लेकर काफी संदेह और अस्पष्टता रही है। खासकर उन मामलों में जहां कर्मचारी काम पर जाते समय या काम से लौटते समय दुर्घटना के शिकार होते हैं। पीठ ने कहा कि तथ्यों के आधार पर विभिन्न निर्णयों ने इसकी अलग-अलग व्याख्या की है।

पीठ ने कहा, "हम अधिनियम की धारा 3 में प्रयुक्त वाक्यांश 'उसके रोजगार के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना' की व्याख्या इस प्रकार करते हैं कि इसमें किसी कर्मचारी के साथ उसके निवास स्थान से ड्यूटी के लिए रोजगार के स्थान पर आने-जाने के दौरान या ड्यूटी करने के बाद रोजगार के स्थान से उसके निवास स्थान तक आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटना भी शामिल है। बशर्ते कि दुर्घटना घटित होने की परिस्थितियां समय और स्थान तथा रोजगार के बीच संबंध स्थापित हो।
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2011 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को किया रद्द
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने दिसंबर 2011 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर फैसला सुनाया। पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि तथ्यों के आधार पर, विभिन्न फैसलों ने इसकी अलग-अलग व्याख्या की है। कर्मचारी क्षतिपूर्ति (ईसी) अधिनियम, 1923 की धारा 3, क्षतिपूर्ति के लिए नियोक्ता के दायित्व से संबंधित है। हाईकोर्ट ने कामगार क्षतिपूर्ति आयुक्त और उस्मानाबाद के सिविल जज के आदेश को रद्द कर दिया था। 

क्षतिपूर्ति आयुक्त और सिविल जज ने पीड़ित के परिवार के सदस्यों को ब्याज सहित 3,26,140 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। कर्मचारी की ड्यूटी पर जाते वक्त एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, मृतक एक चीनी कारखाने में चौकीदार के रूप में कार्यरत था। दुर्घटना के दिन 22 अप्रैल, 2003 को उसकी ड्यूटी का समय सुबह 3 बजे से 11 बजे तक था।

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पीठ ने कहा कि यह निर्विवाद है कि वह अपने ड्यूटी स्थल की ओर जा रहा था, जब कार्यस्थल से लगभग पांच किलोमीटर दूर दुर्घटना घटी। इस मामले में साफ है कि मृतक रात्रिकालीन चौकीदार था। समय पर पहुंचने के लिए वह घर से निकला और रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। इसमें हादसे की परिस्थितियों, समय और स्थान तथा चौकीदार के रूप में उसके रोजगार के बीच स्पष्ट संबंध था। इसलिए कामगार क्षतिपूर्ति आयुक्त और सिविल जज का क्षतिपूर्ति आदेश पूरी तरह उचित था।

 
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