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सुप्रीम कोर्ट: चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा- आतिशबाजी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगी अदालत

Tue, 13 Oct 2026 06:10 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ किया है कि अदालत आतिशबाजी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगी। शीर्ष अदालत ने पटाखों पर पूरी तरह रोक से इन्कार संकेत देने के साथ-साथ बेरोकटोक इस्तेमाल की इजाजत भी नहीं दी। जानिए अदालत में क्या कुछ हुआ
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संकेत दिया कि वह पटाखों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाएगा और न ही इनके बेरोकटोक इस्तेमाल की इजाजत देगा। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पाबंदी लगाने पर विचार करते समय धार्मिक भावनाओं व सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
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मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची व जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने नागरिकों को पटाखों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक करने व सुरक्षित तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के महत्व पर बल दिया। सीजेआई ने कहा, हम धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन पूरी प्रक्रिया में संतुलन बनाने वाला नजरिया होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी।

एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने क्या कहा?
पटाखे जलाना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा नहीं है। इसे धर्म से क्यों जोड़ा जा रहा है? अगर देवताओं को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे परेशान हो रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं तो वे बहुत दुखी होंगे। सही ढंग से लागू किए बिना पटाखों पर पाबंदी बेअसर रहेगी और मकसद भी पूरा होने की संभावना कम है। अदालत यह भी जानती है कि इसे लागू नहीं किया जाता है। पुलिस अधिकारियों के लिए हर समय हर गली में मौजूद रहना नामुमकिन है।
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पराली निस्तारण के लिए फ्रेमवर्क तैयार
इस दौरान पराली जलाने से रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई। जस्टिस बागची ने राज्यों के उन प्रस्तावों का जिक्र किया, जिनमें फसल अवशेष खरीदने और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावना तलाशने की बात कही गई थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि फसल के अवशेषों के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर ले जाकर) प्रबंधन के लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार है। केंद्र सरकार इस समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी।

सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी में क्या है खास?
हमें कोई भी आदेश जारी करते समय बहुत सावधान रहना होगा, जब तक कि हम उसे आसानी से लागू करने और अमल में लाने की स्थिति में न हों। लोग अक्सर पाबंदी वाले निर्देशों को जबरदस्ती थोपी गई कार्रवाई के तौर पर देखते हैं। लोगों से अपील करने के लिए काफी समय है कि वे अपनी पसंद के तरीके से त्योहार मनाएं लेकिन पटाखे जलाने का समय तय रखें, जैसा कि पहले भी किया गया है। इस मुद्दे पर सुझावों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सामने रखा जा सकता है।
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