सुप्रीम कोर्ट ने आधार की वैधता व अनिवार्यता पर आज अपना अहम फैसला सुनाया, जिसमें कुछ शर्तों के साथ आधार अनिवार्य कर दिया गया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी ने आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनूठा होना बेहतर है और आधार का अर्थ अनूठा है।
कोर्ट ने कहा कि आधार के खिलाफ याचिकाकर्ताओं के आरोप संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर आधारित हैं, जिनके कारण राष्ट्र शासकीय निगरानी वाले राज्य में बदल जायेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आधार संवैधानिक रूप से वैध है।
बता दें कि आधार की संवैधानिक वैधता और इसे लागू करने वाले वर्ष 2016 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर साढ़े चार महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। यह वर्ष 1973 में केशवनंद भारती के ऐतिहासिक मुकदमे के बाद इसे सुनवाई के हिसाब से दूसरा सबसे लंबा मुकदमा माना गया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई मायनों में बेहद अहम है, क्योंकि अब तक देश में 1.21 अरब लोग आधार बनवा चुके हैं और बैंक खातों में सीधे सब्सिडी से लेकर तमाम अन्य तरह की लाभ योजनाओं को लागू करने में इसे बेहद अहमियत दी गई है।