दरअसल उड़ीसा की कुल 21 लोकसभा सीटों में कांग्रेस के पास एक भी नहीं है। 2014 में बीजेडी को 20 और एक सीट भाजपा को मिली थी। वहीं 147 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या मात्र 16 है। 117 सीट बीजेडी और भाजपा के दस विधायक हैं।
कांग्रेस को लगता है कि उड़ीसा में जमीनी हकीकत को देखें तो कांग्रेस के विधायक भाजपा से अधिक हैं। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा उड़ीसा से सिर्फ एक सांसद ही जिता सकी थी। ऐसे में बीजेडी की सत्ता के खिलाफ जो माहौल है उसमें पैठ बनाई जाए। इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस आगे बढ़ रही है और ये साबित करना चाहती है कि बीजेडी का झुकाव भाजपा की ओर ही रहा है।