शीर्ष अदालत ने दो साल से जेल में बंद आरोपी को दी जमानत
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि मुकदमे की सुनवाई शुरू किए बिना ही आरोपी को जेल में रखना सजा के समान है। हत्या की कोशिश के एक मामले में पंजाब के एक व्यक्ति को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने बिना मुकदमा शुरू हुए ही जेल में दो साल गुजार दिए हैं। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस पीवी वराले की पीठ ने 13 मार्च के अपने आदेश में कहा कि प्रदीप कुमार उर्फ बानू के खिलाफ फरवरी 2024 में हत्या के प्रयास सहित विभिन्न अपराधों के तहत मामला दर्ज किया गया था लेकिन अभियोजन पक्ष ने अभी तक इस मामले से जुड़े 23 गवाहों में से किसी से भी पूछताछ भी नहीं की है।
पीठ ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 11 जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए 23 गवाहों से पूछताछ किए जाने का प्रस्ताव रखता है, लेकिन अभी तक किसी से भी पूछताछ नहीं की गई है। इसलिए, मुकदमे को पूरा होने में कुछ समय लगने की संभावना है।
पीठ ने कहा कि कुमार की गिरफ्तारी को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो उस पर मुकदमा शुरू हुआ है और न ही उसका कोई अंत ही नजर आ रहा है। मामले पर समग्र रूप से विचार करते हुए, पीठ इस राय पर पहुंची कि मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक अपीलार्थी को और अधिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है और चूंकि अपील स्वीकार किए जाने योग्य है, इसलिए अपीलार्थी को जमानत दिए जाने का आदेश पारित किया जा सकता है।