फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट: दोहरे हत्याकांड के आरोपी को मिली जमानत रद्द; अदालत ने यूपी के गृह सचिव को दिया यह निर्देश

Sun, 17 Sep 2023 06:04 AM IST
निर्मल कांत राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य अपराध से उत्पन्न होने वाले सभी मामलों की सुनवाई और निर्णय एक ही न्यायाधीश के समक्ष एक ही मुकदमे के दौरान किया जाना चाहिए न कि उन्हें विभाजित करके अलग-अलग अदालतों में सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य अपराध से उत्पन्न होने वाले सभी मामलों की सुनवाई और निर्णय एक ही न्यायाधीश के समक्ष एक ही मुकदमे के दौरान किया जाना चाहिए न कि उन्हें विभाजित करके अलग-अलग अदालतों में सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए। अलग-अलग अदालतों में सुनवाई तब ही हो सकती है जब कोई अपराध, कानून के तहत निर्दिष्ट विशेष अदालत के समक्ष सुनवाई के योग्य नहीं हो।

विज्ञापन
Trending Videos

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने कहा, कई बार ऐसी स्थिति में कम कठोर मामले में आरोपियों के बरी किए जाने का फायदा गंभीर अपराधों के आरोपी उठा लेते हैं। पीठ ने कहा, हमने यह भी देखा है कि कई बार समन्वय की कमी के कारण एक संबंधित अपराध के लिए दायर मामले में एक आरोपी अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत अपर्याप्त सबूतों और अदालत को उचित सहायता प्रदान नहीं करने के कारण बरी हो जाता है।

ऐसी स्थिति में मुख्य मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कमियां रह जाती हैं। पीठ ने दो भाइयों की हत्या के एक मामले और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अन्य अपराधों में एक आरोपी विशाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करते हुए यह आदेश दिया है।

यूपी के गृह सचिव अभियोजन निदेशालय को बनाएं संवेदनशील
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव को अभियोजन निदेशालय को संवेदनशील बनाने और सुव्यवस्थित करने के लिए तत्काल उपचारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया। दरअसल, इस मामले में पीठ ने पाया कि आरोपी पर शस्त्र अधिनियम और गैंगस्टर अधिनियम के तहत अपराधों के लिए अलग से मुकदमा चलाया गया था। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के गृह सचिव को भेजने का निर्देश दिया।
 
विज्ञापन

दोहरे हत्याकांड में दो साल के अंदर जमानत देने पर भी जताई नाराजगी
दोहरे हत्याकांड की इस गंभीर घटना के दो साल के भीतर जमानत दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में एक अन्य आरोपी के जमानत रद्द करने के उसके पिछले आदेश को हाईकोर्ट के संज्ञान में नहीं लाया गया था। हाईकोर्ट ने मुकदमे के समापन में अनिश्चितता, पुलिस की एकतरफा जांच, आरोपी पक्ष के मामले की अनदेखी जैसे कारकों पर ध्यान दिया था। हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया था कि विचाराधीन कैदी होने के कारण अभियुक्त संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई का हकदार है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें