वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर खच्चरों के मालिकों के पुनर्वास पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि सलाहकार परिषद के गठन के तीन हफ्ते के भीतर राज्य सरकार सभी हितधारकों के साथ बैठक कर इस पर निर्णय ले। पीठ ने यह भी कहा कि चूंकि इसमें खच्चर मालिकों का भी हित जुड़ा है, इसलिए योजना बनाने में उन्हें भी शामिल किया जाए। इस पर अगली सुनवाई 30 अगस्त को होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि खच्चरों के कारण मंदिर के रास्ते में भारी गंदगी होती है। उन्होंने कहा कि इस पर रोक लगनी चाहिए। इस पर राज्य सरकार और श्राइन बोर्ड ने कहा कि खच्चरों पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाई जानी चाहिए।
उनका कहना था कि इस रास्ते में करीब 4600 खच्चर हैं। बहुत सारे श्रद्धालु खच्चर से आते-जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई अन्य जगहों पर भी खच्चरों का इस्तेमाल होता है। पहाड़ी इलाकों में सेना भी खच्चरों का इस्तेमाल करती है।
श्राइन बोर्ड ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि रास्तों पर सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि करीब एक हजार सफाईकर्मी हैं। चूंकि खच्चरों की संख्या ज्यादा है, इसलिए किसी वक्त पर गंदगी हो सकती है, लेकिन सफाई का काम सही तरीके से किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने पर्यावरण संकट को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित करने की भी मांग की, हालांकि पीठ ने इस पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।