शिक्षकों की अस्थायी भर्ती से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कब तक यह व्यवस्था चलती रहेगी। अगर शिक्षकों की अस्थायी भर्ती होगी तो वह कैसे छात्रों को पढ़ाने के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रह सकते हैं। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) के तहत नियुक्त शिक्षक भर्ती को निरस्त करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर की।
पीठ ने कहा, अगर शिक्षकों में नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना रहेगी तो वे कैसे कर्तव्यों को सही तरीके से निभा सकेंगे और खासकर ऐसे कठिन इलाकों में। दरअसल, पिछले साल हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएमसी शिक्षकों की भर्ती को निरस्त कर दिया था और राज्य सरकार को छह महीने में स्थायी भर्ती का आदेश दिया था। एसएमसी शिक्षक एसोसिएशन ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
एसोसिएशन के वकील सीए सुंदरम ने सुनवाई के दौरान कहा, एसोसिएशन के कई सदस्य पूर्णकालिक शिक्षक हैं, लेकिन ठेके पर हैं। उनके लिए एक दिन में पढ़ाने की सीमा तय नहीं है। पहाड़ी इलाकों में शिक्षकों की भारी कमी है। ये शिक्षक दस साल से ज्यादा समय से पढ़ा रहे हैं। सभी योग्यता रखते हैं। इस पर जस्टिस रस्तोगी ने कहा, लाखों लोग योग्यता रखते हैं, लेकिन सभी नियुक्ति पाने का दावा नहीं कर सकते।
फिलहाल आदेश पर रोक नहीं
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष जानना चाहा। राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल अभिनव मुखर्जी ने पीठ को बताया कि सरकार भी इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करना चाहती है। उन्होंने बताया कि जल्द ही याचिका दायर की जाएगी। जिसके बाद पीठ ने सुनवाई आठ अक्टूबर के लिए टाल दिया। हालांकि पीठ ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है।
कोर्ट ने पूछा, कितने शिक्षक थे कार्यरत
पीठ ने यह भी जानना चाहा है कि इस योजना के तहत कितने शिक्षक कार्यरत थे। वे शहरी इलाकों में कार्यरत थे या दूरदराज के इलाकों में और उन्हें मासिक वेतन कितना मिलता था।