हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्या केंद्र सरकार न्याय-व्यवस्था पर ताले जड़ना चाहती है। क्या सरकार पूरी न्यायिक व्यवस्था को तबाह करना चाहती है। शीर्ष अदालत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह इसे अहम का मसला न बनाए। साथ ही अदालत ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर जल्द सब ठीक नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और कानून मंत्रालय केसचिवों को अदालत में तलब किया जा सकता है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस संस्थान(न्यायपालिका) को खराब कर रही है। पीठ ने कहा कि वह कार्यपालिका को सिस्टम को तबाह करने की इजाजत नहीं दे सकती। पीठ ने कहा कि सरकार को न तो संस्थान के क्रियाकलाप को बर्बाद कर सकती है और न ही उसे पूरे सिस्टम को गतिहीन करने की इजाजत दी सकती।
पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि न्यायपालिका किसी अन्य संस्थान केसाथ टकराव नहीं चाहती है लेकिन यह सरकार को यह सुनिश्चित करना है कि इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो। पीठ ने कहा जजों की नियुक्ति को लेकर अब तक सब ठीक चल रहा था। हम चाहते हैं कि सरकार के साथ ऐसा ही सहयोग जारी रहे लेकिन कार्यपालिका की उदासीनता, अक्षमता से संस्थान को तबाह करने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती।