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सुप्रीम कोर्ट: कोरोना मुआवजे के फर्जी दावों पर शीर्ष अदालत नाराज, कहा- सोचा नहीं था कि हमारी नैतिकता इतनी नीचे जा सकती है 

Mon, 14 Mar 2022 09:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने केंद्र सरकार की भी खिंचाई की क्योंकि पिछली तारीख पर दिए गए निर्देश के बावजूद सरकार समस्या को उजागर करते हुए औपचारिक आवेदन दायर करने में विफल रही।
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कोरोना के मामले - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोविड-19 का मुआवजा लेने के लिए डॉक्टरों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर गंभीर चिंता जताई और कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारी नैतिकता इतनी नीचे जा सकती है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि वह फर्जी दावों की जांच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने का निर्देश दे सकती है।

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पीठ ने केंद्र सरकार की भी खिंचाई की क्योंकि पिछली तारीख पर दिए गए निर्देश के बावजूद सरकार समस्या को उजागर करते हुए औपचारिक आवेदन दायर करने में विफल रही। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को आवेदन दाखिल करने के लिए मंगलवार तक का समय दिया है। मेहता ने सोमवार को डॉक्टरों द्वारा बेईमान लोगों को अनुग्रह राशि (मुआवजा) का दावा करने के लिए जारी किए जा रहे फर्जी प्रमाणपत्र की समस्या की ओर इशारा किया। इस पर पीठ ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इस योजना का दुरुपयोग किया जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि अगर इसमें कुछ अधिकारी भी शामिल हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है।

कोई शिकायत तो दर्ज कराए
याचिकाकर्ता वकील गौरव कुमार बंसल ने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा-52 की ओर इशारा किया, जो इस तरह की चिंताओं को दूर करता है। इस पर पीठ ने कहा कि हमें जरूरत इस बात की है कि कोई इसे संबंध में शिकायत दर्ज कराए। वहीं वरिष्ठ वकील आर बसंत ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों द्वारा मुआवजे के दावों की औचक जांच करने का सुझाव दिया।
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प्रत्येक मौत के लिए 50 हजार का मुआवजा न कि प्रभावित परिवार के हर बच्चे के लिए
बच्चों को मुआवजे के पहलू पर असम की ओर से पेश वकील दीक्षा राय द्वारा दायर आवेदन पर शीर्ष अदालत ने साफ किया कि उसके द्वारा 50 हजार रुपये मुआवजे का आदेश कोविड-19 से हुई प्रत्येक मौत के लिए भुगतान किया जाना है न कि प्रभावित परिवार के प्रत्येक बच्चे को किया जाना है। इससे पहले सात मार्च को भी शीर्ष अदालत ने डॉक्टरों द्वारा कोविड मुआवजा का दावा करने के लिए लोगों को फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्र जारी करने पर चिंता व्यक्त की थी।

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