आजादी के बाद शायल यह पहला मौका होगा जब सुप्रीम कोर्ट ने एक ही सप्ताह में दो ऐतिहासिक फैसले सुनाए। वहीं सीबीआई कोर्ट ने भी साध्वी यौन शोषण मामले में बाबा राम रहीम को दोषी करार दिया है। हालांकि कोर्ट ने उन पर फैसला सोमवार तक के लिए टाल दिया है। ऐसे में अगर इस हफ्ते को न्याय का सप्ताह करार दिया जाए तो गलत नहीं होगा।
सबसे पहल शीर्ष अदालत ने 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया जबकि इसके अगले ही दिन निजता के अधिकार पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने इसे नागरिकों का मौलिक अधिकार माना। वहीं आज बाबा रहीम को सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया है।
आईए जानते हैं उन तीन फैसलों के बारे में जिनकी वजह से यह सप्ताह न्याय का सप्ताह कहा जा सकता है-
1. तीन तलाक
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है। 1400 सालों से चल रही तीन तलाक की परंपरा को कोर्ट ने एतिहासिक फैसला दिया। हालांकि मुस्लिमों संगठनों ने इस फैसला का विरोध किया। इस प्रथा में मुस्लिम महिलाओं को शौहर एसएमएस और फोन पर ही तलाक दे रहे थे। कोर्ट ने तीन-दो के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि एक साथ तीन तलाक संविधान में दिए गए बराबरी के अधिकार का हनन है।
पढ़ें- जानिए तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोला दारुल उलूम?
2. निजता का अधिकार
'राइट टू प्राइवेसी' पर SC का बड़ा फैसला, कहा कि ये नागरिकों का मौलिक अधिकार है। आधार कार्ड योजना को दी गई चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। 9 जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि आधार की सूचना लीक नहीं कर सकते, साथ ही निजता की सीमा तय करना संभव नहीं है।
3. बाबा राम रहीम यौन शोषण केस
साध्वी यौन शोषण केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया है। 15 साल, एक आरोपी, तारीख-दर-तारीख 200 से ज्यादा सुनवाई के बाद वह दोषी करार दिए गए।
पढ़ें- साध्वी रेप केस में डेरा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम दोषी करार, फैसले के बाद भड़की हिंसा
बात साल 2002 की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के नाम एक चिट्ठी आई, जो तीन पेज की थी। ये चिट्ठी एक महिला की ओर से भेजी गई थी। इसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की शिकायत की गई। डेरामुखी पर यौन शोषण व दुष्कर्म का आरोप लगाया गया और लिखा गया कि बाबा साध्वियों का यौन शोषण करते हैं।