कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को क्रैंबिज यूनिवर्सिटी में बेटी के दाखिले के लिए 10 दिन के लिए ब्रिटेन जाने की मंजूरी दे दी। उसने इसके लिए कुछ शर्तें भी लगाई हैं और उन्हें तीन दिन में यह वचन देने का निर्देश दिया है कि वह शर्तों और यात्रा अवधि का पालन करेंगे।
सीबीआई ने 15 मई को कार्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसमें 2007 में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड़ रुपये स्वीकार करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की ओर से दी गई मंजूरी में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कार्ति को विदेश जाने की अनुमति दिए जाने को किसी भी अदालत में मिसाल के रूप में पेश नहीं किया जाए।
सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्ति के विदेश जाने की अर्जी पर जांच एजेंसी के रुख पर एक नोट पेश किया। उन्होंने कहा कि विदेश में रहने की निर्धारित अवधि पर नहीं लौटते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।