संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पांच उम्मीदवारों को सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा से दो दिन पहले वंचित करने का फैसला दिया था। इस फैसले के खिलाफ पांचों अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
बुधवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी के निर्णय को अंतरिम तौर पर बदलते हुए अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की इजाजत दे दी।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता युवा हैं और दिन-रात एक करके मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई किया है। लिहाजा, उनके विस्तृत आवेदन पत्र को अस्थायी रूप से स्वीकार किया जाता है। ताकि वे परीक्षा में उपस्थित हो सकें, लेकिन यह कार्यवाही के लिए अंतिम निर्णय के अधीन होंगे।
क्या है मामला
मुख्य परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को अपनी योग्यता परीक्षा का प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक था। याचिकाकर्ता समय सीमा तक प्रमाणपत्र जमा करने में असमर्थ रहे थे।
नई लिस्टिंग प्रणाली से विविध मामलों की सुनवाई के लिए मिल रहा कम समय
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मामलों को सूचीबद्ध (लिस्टिंग) करने की नई प्रणाली के कारण उन्हें विविध मामलों की सुनवाई के लिए कम समय मिलता है। नई लिस्टिंग प्रणाली के अनुसार, मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को नियमित सुनवाई के मामलों को भोजनावकाश से पहले लिया जाता है और विविध मामलों को लंच के बाद सूचीबद्ध किया जाता है।
- जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि यह प्रणाली दोपहर बाद नये मामलों पर सुनवाई के लिए कम समय छोड़ती है। पीठ ने एक मामले में सुनवाई स्थगित करने के अपने लिखित आदेश में कहा है, नई लिस्टिंग प्रणाली मौजूदा मामले की तरह सुनवाई के लिए तय मामलों को सुनने के लिए पर्याप्त समय नहीं दे रही है, क्योंकि दोपहर बाद वाले सत्र में कई मामले सूचीबद्ध होते हैं। पीठ ने उत्तर प्रदेश से जुड़े इस मौजूदा मामले को निपटाने के लिए 15 नवंबर की तारीख तय की है।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित द्वारा पिछले दिनों शुरू की गई नई लिस्टिंग प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नियमित सुनवाई के मामलों की सुनवाई हो। पूर्व में व्यवस्था में मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को पहले विविध और बाद में नियमित मामलों की सुनवाई होती थी।