रेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दो नाबालिग लड़कियों को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी है। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि अबॉर्शन के बाद भ्रूण को सुरक्षित रखा जाए, जिसे आरोपियों के खिलाफ बतौर सबूत पेश किया जा सके।
एक पीड़िता दिल्ली की रहने वाली 13 साल की नाबालिग है, जबकि दूसरी 17 वर्षीय पीड़िता बंगलूरू की है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा , जस्टिस अमिताव रॉय और ए एम खानविलकर की एक बेंच ने यह फैसला सुनाया।
बता दें कि दोनों ही मामलों में गर्भ 20 हफ्तों से ज्यादा का हो गया था, जिसके चलते अबॉर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती थी। अबॉर्शन के लिए दिल्ली में रहने वाली पीड़िता को शुक्रवार को एम्स भेजा जाएगा, जबकि बंगलूरू की पीड़िता को बंगलूरू मेडिकल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट भेजा जाएगा।
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कोर्ट ने एम्स और कर्नाटक सरकार को पीड़िताओं के इलाज का खर्च उठाने को कहा है। दोनों केस में वकील ने कोर्ट के आग्रह किया है कि चूकि दोनों गर्भ की वजह रेप है, इसलिए ये भ्रूण आरोपियों के खिलाफ सबूत का काम करेंगे। जिसके बाद कोर्ट ने भ्रूण को बतौर सबूत रखने की मंजूरी दे दी है।