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SC: राजनीतिक दलों के नियमन को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और ईसीआई से मांगा जवाब

Fri, 12 Sep 2025 03:44 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर विचार करने के लिए सहमति जताई, जिसमें चुनाव आयोग (ईसीआई) को राजनीतिक दलों के पंजीकरण और नियमन के लिए नियम बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता और राजनीतिक न्याय को बढ़ावा मिल सके।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों के पंजीकरण और नियमन के लिए नियम बनाने हेतु भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया है। याचिका में यह मांग धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता और राजनीतिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और चार हफ्तों में जवाब मांगा।

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न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर याचिका पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और भारतीय विधि आयोग को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति कांत ने नोटिस जारी करने की इच्छा जताते हुए बताया कि याचिका में किसी भी राजनीतिक दल को पक्षकार नहीं बनाया गया है। पीठ ने उपाध्याय से कहा, वे कहेंगे कि आप उन्हें विनियमित करने के लिए कुछ मांग रहे हैं और वे यहां मौजूद नहीं थे। पीठ ने उनसे चुनाव आयोग में पंजीकृत सभी राष्ट्रीय दलों को पक्षकार बनाने को कहा।

'फर्जी राजनीतिक दल लोकतंत्र के लिए खतरा'
उपाध्याय की याचिका में आरोप लगाया गया है कि "फर्जी राजनीतिक दल" न केवल लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, बल्कि खूंखार अपराधियों, अपहरणकर्ताओं, ड्रग तस्करों और धन शोधन करने वालों से भारी मात्रा में धन लेकर उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पदाधिकारी नियुक्त करके देश को बदनाम भी करते हैं। याचिका में कहा गया है, राजनीतिक दलों के लिए कोई नियम-कानून नहीं हैं। इसलिए कई अलगाववादियों ने चंदा इकट्ठा करने के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई हैं। इन दलों के कुछ पदाधिकारी पुलिस से सुरक्षा पाने में भी सफल रहे हैं। 
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20 फीसदी कमीशन लेकर काले धन को सफेद करता था राजनीतिक दल
एक हालिया मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि आयकर विभाग को एक "फर्जी" राजनीतिक दल मिला है जो 20 प्रतिशत कमीशन काटकर काले धन को सफेद कर रहा था। वकील अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, राजनीतिक दलों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही जनहित के लिए आवश्यक है क्योंकि वे सार्वजनिक कार्य करते हैं। इसलिए, चुनाव आयोग को उनके लिए नियम-कानून बनाने चाहिए। इसमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और ईमानदारी लाने के लिए कई सुधार शुरू किए हैं।

याचिका में कहा गया है,  संविधान के दायरे में राजनीतिक दलों को विनियमित करने का कदम मज़बूत लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगा।  इसके अलावा, याचिका में भारत के विधि आयोग को विकसित लोकतांत्रिक देशों की सर्वोत्तम प्रथाओं की जांच करने और राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराधीकरण को कम करने के लिए राजनीतिक दलों के पंजीकरण और विनियमन पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश देने की मांग की है।
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