सुप्रीम कोर्ट बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर रैपिडो के खिलाफ नोटिस पर रोक लगाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अवकाश पीठ ने कहा कि वह याचिका पर सात जून को सुनवाई करेगी। दरअसल, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के नोटिस पर रोक लगाते हुए उसे अंतिम नीति के अधिसूचित होने तक बाईक सर्विस के संचालन की अनुमति दे दी थी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
मामले में दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ ने कहा कि अंतिम नीति अधिसूचित होने तक उसके नोटिस पर रोक लगाने का हाई कोर्ट का फैसला रैपिडो द्वारा दाखिल की गई रिट याचिका को अनुमति देने जैसा है।
इससे पहले, 26 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने रैपिडो की याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए उसके एक कानून को चुनौती दी थी। इस कानून के तहत दोपहिया वाहनों को परिवहन वाहनों के रूप में पंजीकृत होने से बाहर रखा गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को एक अंतिम नीति बनाने के लिए कहा था। साथ ही यह भी कहा था कि तब तक बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
वहीं, रैपिडो को चलाने वाली रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि दिल्ली सरकार का आदेश, गैर-परिवहन दोपहिया वाहनों को किराया और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए यात्रियों को ले जाने से तुरंत रोकने का निर्देश देता है। यह बिना किसी कारण या तर्क के पारित कर दिया।
इस साल की शुरुआत में दिल्ली सरकार ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर बाइक-टैक्सियों को दिल्ली में सेवा के संचालन के खिलाफ चेतावनी दी थी। साथ ही कहा था कि इसका उल्लंघन करने वालों को एक लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।